ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले जब भीषण बाढ़ ने गांव की आबादी को उजाड़ा था, तब वह लोग शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थायी तौर पर बस गए थे। अब उनकी कृषि भूमि, जो जीने का आखिरी सहारा थी, उसपर भी खतरा मंडराने लगा है। गत वर्ष से शुरू हुआ कटान इस साल और तेज हो गया है।
फसलें हुई बर्बाद
अब तक करीब डेढ़ दर्जन किसानों की उपजाऊ भूमि नदी में कट चुकी है। इसमें गन्ना, धान और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। बीते दिनों पूर्व प्रधान प्रशांत साना का दो कमरों का पक्का मकान भी नदी में समा गया। ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में पिछले साल बीएसएनएल का टावर भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। इसके साथ ही नदी का रुख बाएं किनारे की ओर गुनहान क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अबतक कोई सर्वे नहीं हुआ है।
नदी किनारे के ग्रामीणों को किया अलर्ट
शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने की जानकारी लगते ही कलीनगर के नायब तहसीलदार अक्षय यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि ग्राम प्रधानों के जरिये लोगों को नदी किनारे न जाने के लिए जागरूक कराया जा रहा है। राजस्व टीमों को भी सक्रिय किया गया है। रमनगरा के गुनहान क्षेत्र में कटान की स्थिति का पता लगाने को टीम भेजी जाएगी।