10 लाख रुपये मुआवजा, बाघ पकड़ने समेत छह मांगों पर आश्वासन के बाद माने ग्रामीण
शनिवार सुबह से ही अधिकारी धरने पर बैठे ग्रामीणों को समझाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीण किसी की मानने को तैयार नहीं हुए। वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखा। उनका कहना था कि वन विभाग की लापरवाही से किसान की जान गई। एसडीएम मयंक गोस्वामी ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद मृतक के पुत्र संजय कुमार ने संपूर्णानगर रेंजर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी।
वहीं, 10 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, आवास, बाघ को पकड़ने और वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने की मांग की। एसडीएम ने आवास स्वीकृत कराने और बाघ को पकड़वाने का आश्वासन दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने पांच लाख रुपये की सहायता राशि दिलाने और परिवार के एक सदस्य को अस्थायी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद करीब 18 घंटे बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा सका।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाघ की मौजूदगी के चलते खेतों में जाने वाले लोगों में पहले से ही दहशत थी। बाघ कई बार मवेशियों और अन्य जानवरों को भी अपना शिकार बना चुका था। इसके बाद भी वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते बाघ को पकड़ लिया जाता तो शुक्रवार को मुंशी प्रसाद की जान नहीं जाती।
एसडीएम मयंक गोस्वामी ने बताया कि पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाने, आवास नियमानुसार स्वीकृत कराने, परिवार के एक सदस्य को वन विभाग में अस्थायी नौकरी दिलाने, बाघ को पकड़वाने के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी मान गए। वन विभाग के अफसरों से अनुमति लेकर बाघ को पकड़वाने को कहा गया है।
नार्थ खीरी वन प्रभाग के एसडीओ मनोज तिवारी ने बताया कि परिजन की मांगों को सुना गया। उन्हें नियमानुसार अन्य विभागों के माध्यम से पूरा कराया जाएगा। विभागीय स्तर पर मुआवजे की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।