टाइगर रिजर्व बनने से जहां जनपद का नाम तो रोशन हो गया, लेकिन टाइगर रिजर्व को ग्राम पंचायतों से सहमति पत्र देने वाले ग्राम प्रधानों की आगामी चुनाव में अपनी कुर्सी डगमगाती दिखाई दे रही है। वन विभाग महिलाओं तक को जलौनी लकड़ी लाने से रोक रहा है, इसको लेकर गांव वालों में उपजे असंतोष को कुछ हद तक शांत कराने के लिए प्रधान सब्सिडी पर रसोई गैस कनेक्शन देने की मांग कर रहे हैं।
टाइगर रिजर्व घोषित करने को वन विभाग वर्षों से प्रयासरत था, लेकिन उसको सफलता नहीं मिल सकी थी। केंद्र सरकार ने भेजे गए प्रस्ताव पर यह आपत्ति लगा दी थी कि वनों से सटे इलाकों के प्रधानों व ग्रामीणों की सहमति के यह संभव नहीं है। जिसके बाद जिला प्रशासन ने आनन-फानन में कागजों में ग्राम सभाओं की खुली बैठकें दिखा व उसमें टाइगर रिजर्व के प्रस्ताव की सहमति दर्शा प्रधान के हस्ताक्षर का सहमति पत्र ले उसे केंद्र सरकार को भिजवा दिया। जिसके बाद ही टाइगर रिजर्व घोषित करने की अधिसूचना जारी की गई थी।
हस्ताक्षर करना साबित हो रहा महंगा
ग्राम प्रधानों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर तो कर दिए, उस समय उनसे यह कहा गया था कि गांवों से सटे इलाकों को बफर जोन किया जाएगा। इसमें ग्रामीणों को जलौनी लकड़ी आदि की सुविधा मिलती रहेगी, लेकिन अब सुविधाएं मिलना तो दूर की बात, पूरी तरह से आवाजाही ही बंद कर दी गई। ग्रामीणों ने इसके विरोध में कई बार विभिन्न संगठनों के साथ आंदोलन भी किया। सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर देने के बाद अब ग्राम प्रधानों को चुनाव नजदीक आने के चलते कुर्सी डगमगाती दिखाई दे रही है।
मिल सकते हैं रसोई गैस कनेक्शन
गत माह बराही के प्रधान सुखदीप सिंह लाडी केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के सचिव कमलकांत के साथ दिल्ली में एनटीसीए के सचिव से मिले थे। जिसके बाद बरेली जोन के मुख्य वन संरक्षक, डीएफओ व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों से स्वास्थ्य कैंप के बजाए सब्सिडी पर गैस कनेक्शन देने की सहमति बनी थी। इस पर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह से गैस कनेक्शन मिलना शुरू हो जाएंगे।