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कोरोना काल में अटका बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, बढ़ा बीमारियों का खतरा

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पीलीभीत। विश्वव्यापी कोरोना महामारी फैलने के कारण नवजात और बच्चों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का अभियान इस बार अटक गया है। शासन ने तो टीकाकरण अभियान दोबारा शुुरू कराया, मगर स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह कोरोना संक्रमण रोकने पर काम कर रही है। टीम के पास बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण करने का समय ही नहीं है। ऐसे में दिखाने के लिए यह काम सिर्फ आंकड़ों में ही चल रहा है। अधिकांश सेंटरों पर टीकाकरण के लिए कर्मचारी नहीं हैं। अगर कोई महिला टीकाकरण के लिए सेंटरों पर जाती भी है तो उसे जानकारी भी नहीं मिलती। इससे आने वाले समय में बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए खतरा हो सकता है।
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हर बार की तरह इस बार भी 22 मार्च से 5 मई तक गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण कराया जाना था। मगर कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने के बाद इसे बीच में ही बंद कर दिया गया। पूरी स्वास्थ्य टीम सब कुछ भूलकर कोरोना संक्रमण से निपटने में लग गई। वह जरूरी भी था। हालांकि बाद में शासन ने छह मई से टीकाकरण शुुरू करने के निर्देश दिए गए। गए। इसके तहत सीएचसी, पीएचसी, जिला महिला अस्पताल के अलावा एएनएम सेंटर पर बीसीजी के टीके, पेंटा फर्स्ट, पेंटा सेकंड, खसरा फर्स्ट और खसरा सेकंड और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने को कहा गया। टीकाकरण के लिए सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार तय कर दिए। इसके बाद न तो इसकी मॉनिटरिंग हुई, न ही कोरोना जैसी महामारी से जंग लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीकाकरण करने की फुर्सत मिली। इसका नतीजा यह निकला कि पीएचसी और एएनएम सेंटरों पर टीकाकरण महज औपचारिकता बनकर रह गया।
सेंटरों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए उन्हें कर्मचारी मिल नहीं पाते। एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर कर्मचारी संतोषजनक जवाब भी नहीं देते। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण कराना बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में ही टीकाकरण का काम बेहतर चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि अप्रैल से 20 मई तक 7181 गर्भवती महिलाओं और 17879 बच्चों का टीकाकरण कराया जा चुका है। अब यह आंकड़े कहां तक सही हैं, यह तो स्वास्थ्य विभाग ही जाने।
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टीकाकरण के लिए तय है निश्चित समय
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजपाल राठौर ने बताया कि नवजात के जन्म के बाद 24 घंटे के भीतर से उसका पहला टीकाकरण होना चाहिए। पहला टीका बीसीजी हिपेटाइटिस बी और पोलियो बीमारी रोकने के लिए लगता है। आखिरी टीका पांच साल की उम्र में विटामिन ए का लगता है। गर्भवती महिलाओं को टिटनेस का टीका लगाया जाता है। गर्भवती महिलाओं को दो टीके लगते हैं। इसमें बच्चे के जन्म के बाद एक माह के भीतर ही दोनों टीके लग जाने चाहिए। दोनों टीकों के बीच एक माह का अंतराल होना चाहिए।
बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
टीकाकरण होने से बच्चों को कई बीमारियों से मुक्ति मिलती है। जैसे बीसीजी के टीके से टीवी, पोलियो के टीके से पोलियो की बीमारी, विटामिन ए से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है। हर टीके की वैक्सीन तमाम तरीके से बीमारी से नवजातों को निजात दिलाती है।
कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद शासन से टीकाकरण पर रोक लगाई गई थी। मगर छह मई से कंटेन्मेंट जोन छोड़कर सभी जगह दोबारा टीकाकरण शुरू हो चुका है। इसमें कहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं है। - डॉ. सीएम चर्तुवेदी, एसीएमओ
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