गांव उदयपुर निवासी 37 वर्षीय किसान शांती प्रसाद की हार्ट अटैक से मौत हो
गई। परिवार वालों का कहना है कि शनिवार को आठ बीघा खेत में मात्र छह कुंतल
फसल देख सीने में तेज दर्द उठा और मौत हो गई। उसकी बेटी पिंकी की 27 अप्रैल
को शादी तय थी। मगर उससे पहले उसकी अर्थी उठने से घर का माहौल मातम में
बदल गया।
बड़े भाई श्यामचरन ने बताया कि शांती प्रसाद के पास आठ बीघा
कृषि जमीन है। उस पर गेहूं की फसल की थी। बारिश से फसल उत्पादन कम हुआ और
मात्र छह कुंतल गेहूं ही निकला। फसल के लिए उसने कुछ लोगों से 27 हजार
रुपये और सितारगंज की पटियाला बैंक शाखा से एक लाख रुपये कर्ज लिया था। फसल
तैयार होने पर शांती प्रसाद ने अपनी बड़ी पुत्री पिंकी की शादी गांव भूड़ा
कैमोर में एक परिवार में तय किया था। 27 अप्रैल को शादी होनी थी। निमंत्रण
पत्र भी लगभग बंट चुका था।
मगर शनिवार को खेत में निकली फसल देखकर
शांती प्रसाद खेत में बैठकर खूब रोया। खेत से घर आते ही उसके सीने में तेज
दर्द हुआ। परिवार वाले उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे कि उसकी
मौत हो गई। किसान की मौत पर उसके परिवार वालों में कोहराम मच गया। इस हादसे
के बाद बहन की शादी के कार्ड बांटने गए शांती प्रसाद के 15 वर्षीय पुत्र
अर्जुन को इसकी सूचना देकर वापस घर बुला लिया गया।
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शांती प्रसाद ने मां का भी
बच्चोें को दिया प्यार
अमरिया।
अरसा करीब पांच साल पहले गांव के बाहर तालाब में मिट्टी लेने गई चार
महिलाओं की तालाब की मिट्टी ढहने से उसमेें दबकर मौत हो गई थी। इन महिलाओं
में शांती प्रसाद की पत्नी रामदेई शामिल थी। पत्नी की मौत के समय शांती
प्रसाद की पांच संतानों में राहुल तो मात्र डेढ़ बरस का ही था। अब 15 साल
का हो चुका अर्जुन, 13 साल का कमल, दस साल की रोशनी भी नासमझ थीं। मां की
मौत पर शांती प्रसाद की बड़ी पुत्री पिंकी ने पिता के कंधे से कंधा मिलाकर
घर परिवार को संभाला। शांती प्रसाद ने तो अपने बच्चों को पिता के साथ मां
का भी प्यार दिया था।