बारहवीं रबी उल अव्वल के मौके पर शहर में आस्ताने हशमतिया से निकाले जाने वाले जुलूस को जरताब रजा द्वारा अनुमति मिलने के बावजूद मंगलवार को उसे रद्द किए जाने की घोषणा के बाद बुधवार पूरे दिन प्रशासन इसे लेकर परेशान रहा। उधर, मौलाना हसन मियां कदीरी व उनके समर्थकों द्वारा जुलूस की अनुमति न मिलने के बावजूद जुलूस में शामिल होने की चर्चा को लेकर पूरे दिन शहर का माहौल गर्म रहा। टकराव की स्थिति को देखते जुलूस मार्ग पर जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और शांति व सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी चौराहों पर पर्याप्त पुलिस बल लगा दिए गए। देर सायं प्रशासनिक अधिकारियों ने जरताब रजा को मना लिया। इसके बाद रात करीब दस बजे आस्ताने हशमतिया से धूमधाम से बारहवीं शरीफ का जुलूस निकाला। जुलूस की अगुवाई जरताब रजा ने खुद किया।
आस्ताने हशमतिया से निकाले जाने वाले इस जुलूस से पहले पिछले साल पीछे से अलग रंग के झंडे के साथ शामिल होने की जिद को लेकर दरगाह उस्मानिया के हसनमियां कदीरी व आस्ताने हशमतिया के जरदाब रजा विवाद हो गया था। इस लिए जरताब रजा ने साफ कर दिया था कि यदि हसनमियां कदीरी गुट के लोगों के साथ न तो वह जुलूस में चलेंगे न उन्हें जुलूस में शामिल होने देंगे। जबकि हसनमियां कदीरी गुट के लोगों का कहना था कि लंबे समय से वह लोग जुलूस में पीछे से शामिल होते रहे हैं। तनाव की स्थिति को देखते हुए पिछले साल प्रशासन ने हसनमियां कदीरी गुट के लोगों को बैरिकेडिंग कर अल्लाहू मियां की मजार पर ही रोक लिया था। इसके बाद जरताब रजा की अगुवाई में जुलूस निकाला जा सका था। इस बार भी यही हालात थे। मंगलवार को जब जरताब रजा ने जुलूस को मुल्तवी (रद्द) किए जाने की घोषणा की तो प्रशासन के हाथपांव फूल गए। जिलाधिकारी मासूम अली सरवर, सिटी मजिस्टे्रट जितेंद्र कुमार शर्मा समेत कई प्रशासनिक अधिकारी जरताब रजा को देर सायं तक मनाते रहे। देर सायं प्रशासन को सफलता मिल गई। जरताब रजा जुलूस की अगुवाई करने को राजी हो गए। देर रात करीब दस बजे जुलूस निकाला गया। इससे पूर्व शहर के सभी प्रमुख मार्गों, बाजार व मोहल्लों की सड़कों पर भव्य सजावट व रोशनी की गई। आस्ताने हशमतिया से निकलने वाले जुलूस के स्वागत को भी इंतजाम अकीदतमंदों ने किए थे।