- जिले में थम नहीं रहा कृषि कार्य में पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्राॅलियों का व्यावसायिक उपयोग
- आए दिन हो रहे हादसों के बाद भी नहीं चेत रहे लोग, जिम्मेदार भी नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। जिले में ट्रैक्टर-ट्राॅली में बैठकर सफर करने का नजारा आम है। सभी प्रमुख चौराहों पर सुबह से शाम तब ट्रैक्टर-ट्राॅली में बैठकर लोग आवाजाही करते देखे जा सकते हैं। यही नहीं ट्राॅली में लदी खाद, टेंट और सामान पर भी बैठकर सफर किया जा रहा है। खतरे के इस सफर से परिवहन विभाग और पुलिस अनजान है।
शुक्रवार की दोपहर करीब दो बजे गोहनिया चौराहे से माधोटांडा जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्राॅली में महिलाएं और बच्चों को मिलाकर करीब 40 लोग सवार थेे। महिलाएं बैठी थीं और छोटे बच्चे ट्रॉली में डाले के पास खड़े थे, जो अचानक ब्रेक लगने पर नीचे गिर सकते थे।
खतरे के बीच सफर कर रहे इन लोगों को खुद की परवाह नहीं थी। बच्चों की फिक्र भी नजर नहीं आई। महत्वपूर्ण बात यह है कि चौराहे पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी इन्हें रोकना-टोकना जरूरी नहीं समझा। अन्य चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियाें ने भी इन्हें नहीं रोका।
यह हाल तब है जब कासगंज में हुए हादसे में कई लोगों की जान चली गई। बावजूद इसके हादसों के बाद अभियान की खानापूर्ति करने वाली पुलिस और परिवहन विभाग भी सजग नहीं दिखा।
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खाद की बोरियों पर बैठकर हो रहा सफर
ट्रैक्टर-ट्राॅली में खाद लादकर बोरियों पर बैठकर सफर आम बात हो गया है। डिग्री कॉलेज और नौगवां चौराहे से प्रतिदिन आठ से 10 बार इस तरह सफर का नजारा दिखता है। राशन की बोरियों पर भी बैठकर सफर किया जा रहा है। एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर सफर करने वालों पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जाएगा। पूर्व में कई ट्रैक्टर-ट्राॅलियों पर कार्रवाई की गई है।
एक वर्ष पहले लगी थी ट्रैक्टर- ट्रॉली से सफ़र पर रोक
एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कानपुर और शाहजहांपुर के पास हुए हादसे के बाद करीब एक वर्ष पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली से सफर पर रोक लगाई गई थी।
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ट्रैक्टर-ट्राॅली पलटने से दो बच्चे घायल
पूरनपुर। हरीपुर जंगल में ट्रैक्टर-ट्राॅली पलटने से गांव रंपुरा निवासी रामआसरे की छह वर्षीय पुत्री सोनम और बहनोई मुकेश का चार वर्षीय पुत्र शिवा घायल हो गए। घायलों को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया है। रामआसरे के बड़े भाई राम खिलौना ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्राॅली से परिवार के लोग शारदा नदी के धनाराघाट पर मुंडन संस्कार में जा रहे थे। संवाद