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अनारक्षित ट्रेनों से पहले दिन 72 यात्रियों ने किया सफर

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पीलीभीत। कोरोना संकट काल में थमे अनारक्षित ट्रेनों के पहिए मंगलवार से पटरियों पर दौड़ने लगे। पहले दिन टनकपुर की ओर 40 और बरेली की ओर 32 यात्रियों ने सफर किया। इससे रेलवे को 2455 आय हुई। अनारक्षित ट्रेनों का संचालन शुरू होने से यात्रियों को काफी राहत मिली है। दोनों ट्रेनों के संचालन से प्लेटफॉर्म पर फिर से रौनक लौट गई।
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कोरोना संक्रमण के चलते बंद हुई दोनों अनारक्षित ट्रेनों का 59वें दिन संचालन शुरू हो गया है। टनकपुर के लिए सुबह 07:15 बजे अनारक्षित ट्रेन संख्या 05341 को लोको पायलट पीयूष कुमार वर्मा, सहायक लोको पायलट एमएल मीना और गार्ड हरेश कुमार लेकर रवाना हुए। इस ट्रेन से सफर करने के लिए 40 यात्रियों ने टिकट खरीदा। सबसे पहला टिकट चकरपुर के लिए बिका। इस ट्रेन से रेलवे को 1345 रुपये की राजस्व आय हुई। दोपहर बाद 03:05 बजे बरेली सिटी के लिए ट्रेन संख्या 05340 को लोको पायलट गौरव कुमार सक्सेना, सहायक लोको पायलट नितिन गंगवार और गार्ड रमेश चंद्र लेकर रवाना हुए। इस ट्रेन से सफर करने के लिए 32 यात्रियों ने टिकट खरीदा। इस ट्रेन के लिए पहला टिकट बरेली सिटी स्टेशन के लिए बिका। रेलवे को 1110 रुपये की आय हुई। दोनों ट्रेनों को पहले दिन निर्धारित समय से रवाना किया गया। अनारक्षित ट्रेनों का संचालन होने से यात्रियों को काफी राहत मिली है।
बरेली के लिए रोडवेज से आना जाना होता था। इससे समय की बर्बादी और अधिक किराया देना पड़ता था। पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होने से समय भी बचेगा और किराया भी आधा लगेगा। काफी सहूलियत हो गई है। - होरीलाल, यात्री
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अनारक्षित ट्रेनों का संचालन शुरू होने से काफी सहूलियत हो गई है। कम किराया और सुरक्षित यात्रा ट्रेन की रहती है। बाहर परिवार के साथ जाने के दौरान ट्रेन का सफर ही ठीक रहता है। - रमेश चंद्र, यात्री
पूर्णागिरि एक्सप्रेस के यात्री होते हैं मायूस
टनकपुर की ओर जाने वाली पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन के यात्रियों को मायूस होना पड़ता है। दिल्ली से सुबह छह बजे ट्रेन के रवाना होने के बाद इस इस ट्रेन के टिकटों की बिक्री बंद हो जाती है। जबकि पीलीभीत में यह ट्रेन 02:40 बजे पहुंची है। टनकपुर के लिए यात्रा करने वाले यात्री इस ट्रेन से सफर करने के लिए सुबह टिकट लेने पहुंचते हैं तो टिकट विंडो पर मायूस होना पड़ता है। जबकि दिल्ली से चलकर ट्रेन करीब साढ़े आठ घंटे में पहुंचती है। इससे यात्रियों को टिकट मिलने की आस रहती है। यात्रियों का कहना है कि मुरादाबाद पहुंचने तक इस ट्रेन के टिकटों की बिक्री होनी चाहिए। इससे यात्रियों को राहत मिलने के साथ ही रेलवे की आय भी बढ़ेगी।
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