आजादी के 65 साल बाद भी देश में लागू आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के संकल्प के साथ जिले में आरक्षण मुक्त भारत अभियान की शुरूआत हुई है। अभियान ही पहली बैठक में वक्ताओं ने आरक्षण को देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की।
नेहरू पार्क में हुई बैठक में संयोजक विकास सिंह चौहान ने कहा कि देश की आजादी के बाद पिछड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा को जोड़ने के उद्देश्य से 10 वर्ष के लिए आरक्षण देने की प्राविधान किया गया था लेकिन राजनीति लाभ लेने के चलते सरकारों ने इसे बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को लाभ देने के उद्देश्य से आरक्षण लागू किया गया था वास्तव में उन्हें इसका लाभ अभी नहीं मिल पा रहा है। चंद लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मनोज मिश्रा ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि देश में 65 साल से आरक्षण व्यवस्था लागू है इसके बाद भी जिन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने को यह लागू किया गया था क्या वह मुख्यधारा में शामिल हो पाए। उन्होंने कहा कि आरक्षण के पीछे रह जाने पर आज प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं और प्रतिभावान नौजवान आत्महत्याएं करने को विवश हैं। संदीप सक्सेना ने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण विरोधी इस मुहिम में साथ आना चाहिए क्यों कि इससे पूरा देश पिछड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार आरक्षण देना जरूरी ही समझती है तो आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को इसका लाभ देे इसमें जाति का भेद नहीं होना चाहिए। बैठक में जल्द ही एक बड़ा आयोजन करने का निर्णय भी लिया गया। यहां अमित मिश्रा, शुभम सक्सेना, अमन शर्मा, मान सिंह, आशीष कुमार, दिनेश गुप्ता, राजीव सक्सेना, विक्रम गुप्ता, इंद्रेश चौहान सहित कई लोग मौजूद रहे।