पीलीभीत। रिछोला क्षेत्र में आंतक मचाने वाली हत्यारी बाघिन पकड़ने के बाद कानपुर ले जाई गई, वहां के चिड़ियाघर में बुधवार सुबह सुरक्षित पहुंचा दी गई। इसके बावजूद अभी इलाके में बाघ के एक कुनबे से गजरौला क्षेत्र में इंसानों पर हमले का डर अभी बाकी है। यह कुनबा दो महीने से क्षेत्र में देखा जा रहा है, उन पर निगाह रखने के लिए वन विभाग लगातार पेट्रोलिंग करेगा, बुधवार को भी यह काम किया गया।
माला रेंज के समीप रिछोला क्षेत्र में एक बाघिन पिछले 20 दिन से आबादी में चहलकदमी कर रही थी। गत रविवार को बाघिन ने रिछोला गांव में दिनदहाड़े एक किसान पर हमलाकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया, वहीं सोमवार रात गोयल कॉलोनी निवासी शुवेंदु विश्वास पर हमला कर उसे मार डाला था। ग्रामीण की मौत पर सोमवार रात जमकर बवाल हुआ। मामला शासन स्तर तक जा पहुंचा। शासन से अनुमति मिलने के बाद मंगलवार शाम जिम कार्बेट की टीम ने हमलावर बाघिन को डॉट मारकर बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) किया। किया। बाघिन को पिंजर में कैद कर गढ़ा रेंज ले जाया गया। जहां विशेषज्ञों ने बाघिन का परीक्षण किया। अधिकारियेां से मंथन के बाद पकड़ी गई बाघिन को रात में ही एसडीओ प्रवीण खरे, कानपुर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह और डॉ. दक्ष गंगवार की देखरेख में कानपुर चिडिय़ाघर भेजा गया। बुधवार सुबह आठ बजे बाघिन को चिड़ियाघर में छोड़कर टीम देर शाम पीलीभीत लौट आई।
इससे पहले मंगलवार देर शाम लखनऊ से वाइल्ड लाइफ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) सुनील पांडे भी पहुंच गए थे। उन्होंने रात में ही घटनास्थल का मौका मुआयना किया और अधिकारियों और वनकर्मियों की हौसला आफजाई की। इस दौरान उन्होंने जंगल क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग जारी रखने के निर्देश भी दिए। कारण यह है कि गजरौला क्षेत्र में अभी एक बाघ, एक बाघिन और उनके दो शावक घूम रहे हैं। इनसे अभी डर बना हुआ है।
...आखिर हो ही गया भाई-बहन का मिलन
पकड़ी गई बाघिन अपने कुनबे से ही बिछड़ने के बाद आबादी क्षेत्र में आ जा रही थी। जानकारों के मुताबिक फरवरी माह में बाघिन ने अपने दो शावकों को छोड़ दिया था। इसमें एक शावक बाघ तीन अप्रैल को पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर घर भेज दिया गया था। यह बाघ ही हमलावर बाघिन का भाई था। कुनबे से अलग हुई बाघिन को शिकार का अनुभव न होने के कारण ही वह आबादी क्षेत्र में आ जा रही है। एक ग्रामीण को मौत के घाट उतारने के बाद बाघिन को भी बेहोश करके पकड़ लिया गया। इसे संयोग ही कहा जाए कि हमलावर बाघिन दो माह पहले जिस भाई से बिछड़ी थी, बुधवार सुबह उसी बिछड़े भाई के पास पहुंच गई।
दबिशें थमी तो ग्रामीणों को भी हुई कुुछ राहत
गजरौला। बाघिन के हमले में ग्रामीण की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने बवाल कर दिया था। इस मामले में 150 लोगों पर संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने मंगलवार को 23 आरोपियों की गिरफ्तारी किए थे। उन्हें कोविड-19 से जुड़ी जांच कराने के बाद जेल भेज दिया गया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद से ग्रामीणों को पकड़े जाने का डर सता रहा था। इसकी वजह से अधिकांश पुरुष गांव से भाग गए थे। मंगलवार रात और बुधवार को दिन भर पुलिस ने दबिश नहीं दी। इस पर ग्रामीणों ने कुछ राहत महसूस की है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अब कार्रवाई के नाम पर किसी निर्दोष का उत्पीड़न न किया जाए। इंस्पेक्टर जयप्रकाश यादव ने बताया कि बुधवार को फिलहाल दबिश नहीं दी गई है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के निर्देशानुसार लगातार पेट्रोलिंग जारी रहेगी। ताकि वन्यजीव जंगल से बाहर न निकल सके। सभी रेंजर और वनकर्मियों को निर्देशित किया गया है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व