आदमखोर हो चुकी बाघिन फिर किसी को अपना शिकार बना सकती है। ऐसा उसको दो दिन से शिकार न मिलने पर भूखे होने के संभावना के चलते माना जा रहा है। हमले की संभावना को देखते हुए वन विभाग की टीमें चांदूपुर से पिपरिया संतोष तक विशेष निगरानी कर रही हैं। खूनी बाघिन ने अपना पहला शिकार 27 नवंबर को पिपरिया करम में बाबूराम को बनाया था। इसके बाद वह रेललाइन और आसाम रोड पार कर पिपरिया करम गांव तक पहुंची, जहां उसने सात फरवरी को जंगल किनारे खेत की रखवाली कर रहे नन्हेंलाल को शिकार बनाया। इसके बाद 48 घंटे तक कोई घटना न होने पर क्षेत्रवासियों और वन विभाग ने राहत की सांस ली है वहीं आगामी 24 घंटे में उसके हमलावर होने की भी संभावना के चलते वन विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। जानकारों का मानना है कि नन्हेंलाल को मारने के बाद बाघिन ने शरीर का काफी हिस्सा खा लिया था जिससे उसका पेट भर गया होगा। अब 48 घंटे से भोजन (शिकार) न मिलने के कारण वह भूखी होगी जिससे हमले की संभावनांए बढ़ गई हैं। इसके चलते वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है।
वापसी कर रही खूनी बाघिन
खूनी बाघिन की गतिविधियां नवंबर और दिसंबर में माधोटांडा थाना क्षेत्र के पिपरिया संतोष गांव के आसपास शुरू हुई थी। इसके बाद वह फरवरी में चहल कदमी करते हुई शाहगढ़ और इसके बाद आगे पिपरिया करम तक पहुंची थी। सात फरवरी को पिपरिया करम में नन्हेंलाल को मारने के बाद इनसे वापसी की है। उसी दिन शाम को पिपरिया करम से आठ किमी वापसी की मानपुर पहुंची थी और अब बृहस्पतिवार को सुबह करीब छह किमी और वापस आकर चांदूपुर के निकट पहुंची है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि बाघिन अपने क्षेत्र पिपरिया संतोष की ओर वापसी कर रही है।
क्षेत्र में लगाए जा रहे 50 कैमरे
बाघिन को जिंदा या मुर्दा पकड़ने का फरमान जारी होने के बाद वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से क्षेत्र में 50 कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। इसमें बृहस्पतिवार शाम तक आधे से अधिक कैमरे लगाए भी जा चुके हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि कैमरे लगाए जा रहे हैं। देररात तक सभी कैमरे लगने की संभावना है।
बाघिन की गतिविधियों पर निगरानी के लिए टीम लगाई गई है। साथ ही कैमरों के माध्यम से भी उसे ट्रैप करने का प्रयास किया जा रहा है। बाघिन का अब कोई हमला न हो इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।
- केपी सिंह, एसडीओ