माधोटांडा पीलीभीत मार्ग पर माला जंगल में लगने वाले सिद्धबाबा मेले पर इस बार बाघ का खतरा मंडरा रहा है। 31 मार्च को मेला स्थल के निकट नहर पर बाघ ने जमुनिया के किसान श्यामबिहारी को निवाला बनाया था। इसको लेकर वन विभाग ने इस बार स्थाई दुकानें न लगवाने का निर्णय लिया है। जिले के जंगलों एवं इसके बाहर छह माह से बाघों का आतंक है। अलग अलग क्षेत्रों में हमले की घटनाएं हो रही है। बाघ के हमले में 12 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें एक हमला 31 मार्च को सिद्ध बाबा स्थल के निकट उस नहर के पास हुआ था जिसमें मेले में आने वाले श्रद्धा नहाते हैं। बाघ ने मुख्य मार्ग पर नहर से मात्र 100 कदम की दूरी पर नरकुल काट रहे जमुनिया निवासी श्यामबिहारी पर हमला कर मार डाला था। दूसरे दिन उनका शव मिला था जिसका अधिकांश हिस्सा बाघ ने खा लिया था। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में निगरानी की जा रही है। बुधपूर्णिमा से यहां सिद्धबाबा का मेला भी शुरू हो गया है। इसके चलते वन विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। माला के वन क्षेत्राधिकारी डीके श्रीवास्तव ने बताया इस बार केवल दिन में ही दुकानें लगेंगी और भंडारे होंगे। अंधेरा होने से पहले श्रद्धालु और दुकानदारों से जंगल खाली करा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेले में भंडारा में प्लास्टिक, फाइवर अथवा पॉलीथिन के थालप, गिलास कटोरी आदि पर भी हमेशा की तरह प्रतिबंध हैं। असुविधा से बचने के लिए भंडारा के आयोजक पत्ते से निर्मित थाली और कुल्हड़ आदि लेकर आएं।