पीलीभीत/न्यूरिया। शहर से सटे इलाके में बाघ ने छुट्टा सांड को निवाला बनाने के बाद गन्ने के खेत में ही डेरा जमा लिया। घटना की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण धारदार हथियारों के साथ मौके पर जा पहुंचे। सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। उन्होंने ग्रामीणों को शांत किया। डीएफओ के निर्देश पर खेत के तीन ओर खाबर (जाल) लगाकर बाघ को खदेड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
घटना माला रेंज के अंतर्गत वनकटी रोड स्थित गांव टाह के समीप हुई। गांव निवासी गुरनाम सिंह सोमवार सुबह अपने खेत पर गए थे। इस दौरान उन्हें पास के ही एक गन्ने के खेत में हलचल होने के साथ बाघ के पगचिह्न दिखाई दिए। इस पर उन्होंने तत्काल इसकी सूचना ग्रामीणों की दी। बताते हैं कि पहले से आक्रोशित ग्रामीण हाथों में धारदार हथियारों के अलावा लाठी डंडों और असलहों से लैस होकर पहुंच गए और खेत की घेराबंदी शुरू कर दी। इस बीच कुछ ग्रामीण गन्ने के खेत में भी जा घुसे। उन्हें मंगल सिंह के गन्ने के खेत में एक सांड़ का अधखाया हुआ शव मिला। इस पर ग्रामीणों को समझते देर न लगी कि इस घटना को बाघ ने ही अंजाम दिया है। अनहोनी की आशंका पर ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना कुछ देर बाद तक वनकर्मियों के पहुंचने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। हालांकि कुछ देर बाद वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद सामाजिक वानिकी प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार, एसडीओ प्रवीण खरे, माला रेंजर रामजी भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों को बमुश्किल शांत कराया।
अफसरों के घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सांड़ के शव को खेत में ही दफना दिया गया। निरीक्षण में पाया गया कि बाघ के खेत में आने के तो पगचिह्न हैं, मगर लौटने के नहीं है। इससे साफ है कि वह खेत में या आसपास ही है। डीएफओ के निर्देश पर वनकर्मियों ने गन्ने के खेत में तीन ओर खाबर (जाल) लगा दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक बाघ को जंगल में खदेड़ दिया जाएगा। बाघ की मौजूदगी से टाह समेत आसपास गांवों के दहशत देखी जा रही है। गन्ने के खेत में बाघ होने की आशंका के चलते अधिकांश ग्रामीण खेतों पर भी नहीं जा सके।
माला रेंज के अंतर्गत गांव टाह के समीप बाघ ने एक पशु को अपना निवाला बनाया है। बाघ के खेत के आसपास ही जमे होने के संकेत हैं। सुरक्षा की दृष्टि से गन्ने के खेत के तीन ओर खाबर लगवा दिया है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही है। उम्मीद है कि देर-सबेर बाघ जंगल में चला जाएगा। - संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग