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अभी बाघ नहीं... शावकों को जंगल में शिफ्ट करने की तैयारी

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पीलीभीत। अमरिया क्षेत्र में पिछले आठ साल से आबादी क्षेत्र में प्रवास कर रहे बाघों का मामला पेचीदा होता जा रहा है। बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विभागीय अफसरों ने बाघों की शिफ्टिंग से पूर्व उनके जवान होते तीन शावकों को जंगल में शिफ्ट कराने की कवायद शुरू कर दी है।
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नवंबर 2012 में टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर एक बाघिन अमरिया क्षेत्र में पहुंच गई थी। बाघों के प्रजनन से यह कुनबा बढ़ता गया और वर्तमान में यहां करीब 10 बाघ हैं। आबादी क्षेत्र में प्रवास कर रहे इन बाघों से क्षेत्रवासियों में खासी दहशत रहती है। यह दीगर बात है कि पिछले डेढ़ सालों से यह बाघ कभी इंसानों पर हमलावर नहीं हुए। इस क्षेत्र के खेतों में चहलकदमी कर रहे इन बाघों को जंगल की हद में पहुंचाने को भारी भरकम राशि भी खर्च की गई, मगर इस अभियान को सफलता नहीं मिल सकी। सामाजिक वानिकी के अफसरों के मुताबिक, डब्ल्यूटीआई और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से इन बाघों की मॉनिटरिंग पांच सदस्यीय टीम द्वारा की जा रही है। बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए साल के शुरूआत में ही प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव सुनील कुमार पांडे ने यहां के बाघों को दूसरे जंगलों में शिफ्ट करने को डब्ल्यूआईआई (वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) से अनुमति और मदद के लिए पत्र भेजा था। फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
युवा हो रहे तीन बाघों की होगी शिफ्टिंग
अमरिया क्षेत्र में बाघों की कुनबा तो बढ़ता जा रहा है, मगर वन विभाग के लिए आबादी क्षेत्र में प्रवास कर रहे बाघों की बढ़ती संख्या बड़ी समस्या बनती जा रही है। इधर पिछले दिनों राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण (एनटीसीए) के डीआईजी निशांत वर्मा ने भी अमरिया का दौरा कर बाघों और उनकी मॉनिटरिंग का जायजा लिया था। इसके बाद सामाजिक वानिकी विभाग ने अमरिया क्षेत्र में बाघों की शिफ्टिंग से पूर्व बाघों के युवा हो रहे तीन शावकों को जंगल में शिफ्ट कराने की कवायद शुरू कर दी है। सामाजिक वानिकी के मुताबिक करीब ढाई साल पहले बाघिन ने तीन शावकों को जन्म दिया था। यही तीन शावक अब युवा होते जा रहे हैं। बाघों की संख्या नियंत्रित रखने और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर तीनों युवा बाघों को जंगल में शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी है। इसको लेकर सामाजिक वानिकी ने प्रस्ताव बनाकर भी उच्चाधिकारियों को भेज दिया है।
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यदि बाघ इंसानों पर हमलावर हुए तो क्या सुरक्षित रह पाएंगे बाघ
सामाजिक वानिकी के मुताबिक, अमरिया में जंगल से बाहर प्रवास कर रहे बाघों को व्यवहार मित्रवत होता जा रहा है। इधर, दूसरे पहलू से सोचे तो यदि कोई बाघ इंसान पर हमलावर होता है तो ऐसी दशा में क्या गारंटी है कि लोग हमलावर बाघ समेत अन्य बाघों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस समय एक तेंदुए द्वारा पालतू जानवरों के मारे जाने के बाद यहां स्थिति पेचीदा होती जा रही है। क्षेत्रवासियों ने तो बैठक कर वनकर्मियों पर बाकायदा खेतों में घुसने पर ही पाबंदी लगा दी है। इन सब हालातों को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि आबादी क्षेत्र में प्रवास कर रहे इन बाघों को भविष्य में यहां से हटाना ही होगा।
पिछले दिन एनटीसीए के डीआईजी ने अमरिया क्षेत्र का दौरा कर यहां का जायजा लिया था। बाघों की संख्या बढ़ने की बात उनके समक्ष रखी गई थी। उसके बाद यहां युवा हो रहे तीन शावकों को जंगल में शिफ्ट करने की योजना चल रही है। इसको लेकर पत्राचार भी किया गया है। - संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी
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