मजदूर केवल प्रसाद की बाघ के हमले में मौत के बाद एक बार फिर रुपपुर गांव के ग्रामीण दहशत में हैं। यह दहशत सिर्फ शनिवार को हुए महज एक हमले की नहीं है। इस गांव में काफी समय से बाघ की दहशत कायम है। जिसका आज तक वनविभाग की ओर से कोई समाधान नहीं कराया जा सका।
मजदूर की मौत के बाद जमा हुए ग्रामीणों का कहना है गांव जंगल से सटा हुआ है। इसलिए यहां पर जंगली जानवरों की चहलकदमी कोई नई बात नहीं है। अक्सर बाघ गांव की गलियों और खेतों में देखा जाता रहा है। दहशत का आलम यह है कि सूरज ढलते ही लोग घरों में दुबक जाते हैं, खेत पर जाने से डर लगता है। अगर कोई परिवार का सदस्य देर शाम तक नहीं वापस आता तो उसकी चिंता सताने लगती है। ग्रामीण एकजुट होकर उसको तलाशने निकल पड़ते हैं। यही कारण रहा कि शुक्रवार देर शाम केवल प्रसाद के घर न आने पर परिवारीजन और ग्रामीण उसको तलाशने निकले। आखिर वही हुआ जिसका डर सभी को सता रहा था। मजदूर का क्षत विक्षत शव खेत से सटे जंगल में मिला। जंगली जानवरों की चहकमदमी को लेकर कई बार शिकायत वनविभाग के अधिकारियों से की गई। गांव के लोगों की जिंदगी से जुड़ी इस समस्या के समाधान पर गंभीरता से कार्य करने की मांग की गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान विभाग की ओर से नहीं किया जा सका। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद लोगों ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए आक्रोश जताया।