जनपद के जंगलों को टाइगर रिजर्व बने साढ़े चार साल होने जा रहे हैं। यहां इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को चूका बीच और सप्त सरोवर सहित कई तालों को विकसित किया जा चुका है। दुधवा नेशनल पार्क की तर्ज पर पर्यटकों से किराया भी वसूला जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद टाइगर रिजर्व प्रशासन विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सका। इसमें प्रदेश सरकार की उदासीनता प्रमुख कारण है। बजट के अभाव में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठंडे बस्तों में पड़ी हैं। जिनके टाइगर रिजर्व में लागू होने के बाद यहां के जंगल और इको टूरिज्म को दुधवा नेशनल पार्क से भी अच्छी पहचान मिल सकती है।
सीएम के आगमन पर गेस्टहाउस व हट हुए थे वातानुकूलित
जब टाइगर रिजर्व घोषित हुआ तो प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यहां बुलाने की तैयारी शुरू हुई। जिले के दो मंत्रियों की हामी के बाद आननफानन में सभी रेंजों के गेस्ट हाउस व चूका बीच की हटों को वातानुकूलित किया गया। बड़े जनरेटर लगवाए गए। यह दीगर बात थी कि मुख्यमंत्री जिन्हें सपरिवार यहां आना था, नहीं पहुंचे सके, लेकिन उनके दौरे की भनक से ही गेस्टहाउसों के दिन बहुर गए।
पर्यटन को बढ़ावा देने को अधिकारियों लगाया एड़ी चोटी का जोर
दुधवा नेशनल पार्क की तरह यहां भी देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़े। वन विभाग के अधिकारियों ने यहां कई परियोजनाएं लागू करने की शुरुआत की। तत्कालीन प्रमुख सचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद ने गैंडा परियोजना का सर्वे कराया। महोफ व बराही रेंज के रकबे को मिलाकर लगभग 1500 हेक्टेयर में गैंडा परियोजना का सर्वे कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जो लंबित है।
बराही जंगल में टाइगर सफारी का भेजा था प्रस्ताव
टाइगर रिजर्व में पर्यटन को बढ़ावा के उद्देश्य से वन संरक्षक बरेली वृत वीके सिंह का यह प्रयास रहा कि पर्यटकों को आसानी से बाघ के दर्शन कैसे हो? उन्होंने जंगलों के बाहर घूमने वाले बाघों को पकड़कर दूसरे चिड़ियाघरों में भेजने के बजाए पीलीभीत के जंगलों में ही खुले में रखने की रणनीति बनाते हुए टाइगर सफारी का प्रस्ताव शासन को भेजा। पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर बराही के बरुआ कुठारा क्षेत्र में भूमि का चयन किया गया। यह मामला भी शासन स्तर पर लंबित है।
माला में खुलना है प्रदेश का पहला रेस्क्यू सेंटर
टाइगर सफारी खोलने से पूर्व सरकार को सेंट्रल जू अथारिटी से अनुमति लेनी होगी। चूंकि यह सब इसलिए किया जा रहा है कि जंगलों से बाहर निकले बाघ बड़े पैमाने पर इंसानों पर हमले कर रहे हैं, ऐसे में जो बाघ बाहर निकल रहे है, उन्हें बाहर निकलते ही पकड़ने को रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की व्यवस्था के साथ बाघों के भोजन की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए दस हेक्टेयर का एरिया चिह्नित किया गया है। इसमें 15 से 20 बाघों के रहने की व्यवस्था की बात भी कही जा रही है।
अभी इको टूरिज्म की भी काफी है गुंजाइश
टाइगर रिजर्व प्रशासन चाहे तो जिला प्रशासन को इस बात के लिए राजी कर सकता है कि विभिन्न मदों से धन आवंटित कर यहां चूका बीच की तर्ज पर एक और खूबसूरत स्पाट बनाया जा सकता है। जिसमें पर्यटकों के ठहरने को हटों व अन्य सुविधा भी हो।
मुख्यमंत्री चूका बीच विकसित करने को दे गए थे हरी झंडी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब जनपद भ्रमण पर आए, तो वह चूका बीच भी गए। यहां की खूबसूरत वादियों को देखकर उन्होंने इस क्षेत्र को और विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि डैम में भी पर्यटकों के घूमने का प्लान बनाए, धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
टाइगर रिजव की दो रेंजों के क्षेत्र को रखा अछूता
इको टूरिज्म को बढ़ावा देने में टाइगर रिजर्व की हरीपुर और दियोरिया रेंज के जंगल को अछूता रखा गया, जबकि बाघों की मौजूदगी के साथ टाइगर रिजर्व व सेंचुरी से हरीपुर रेंज का जंगल भी सटा हुआ है।
चूका बीच में तीन दिन पहले वन निगम इको टूरिज्म के डीएलएम अतुल अस्थाना आए थे। उन्होंने यहां का जायजा लेने के साथ चूका बीच में हटों की संख्या बढ़ाने की बात कही थी। पर्यटकों के लिए मोटर बोट की योजना भी बनाई जा रही है। पर्यटकों को अच्छी सुविधाएं मिले, इसको लेकर बजट के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रमोद कुमार पांडे, चूका प्रभारी, वन निगम
आला अफसरों के निर्देश पर महोफ व बराही जंगल में के 1500 हेक्टेयर में गैंडा परियोजना का सर्वे कर प्रोजेक्ट भेजा जा चुका है। बराही के बरुआकुठारा में टाइगर सफारी के लिए भूमि का चयन कर रिपोर्ट भेज दी गई है। माला रेंज में रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। अब मामला प्रदेश स्तर पर विचाराधीन है।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी