पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में नए सिरे से चारागाह और जलस्रोत विकसित किए जाएंगे, ताकि बाघ, भालू, तेंदुआ समेत सभी वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक आशियाना मुहैया कराए जाने के साथ ही उनके खाने-पीने की माकूल व्यवस्था हो सके। इसे लेकर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नेशनल वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान जारी किया गया है। यदि इस प्लान का दृढ़ता से पालन हुआ तो वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने के मामलों में कमी तो आएगी ही साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी काफी हद तक रुक सकेंगी।
तराई के करीब 73000 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। यहां करीब 65 बाघों के साथ बड़ी संख्या में तृणभोजी वन्यजीव हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के लिहाज से जंगल का दायरा छोटा होता नजर आ रहा है और वहीं जंगल की जमीन पर अतिक्रमण के चलते पीटीआर की हदें भी सिकुड़ती जा रही हैं। जंगल के भीतर वन्यजीवों के वासस्थल नष्ट होते जा रहे हैं। ग्रास लैंड भी कम होते जा रहे हैं। यही वजह है कि तृणभोजी वन्यजीव तेजी से जंगल की हदों को पार कर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं शिकार का पीछा करते हुए बाघ भी रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। इसी के चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बेहिसाब हो रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पीटीआर के पास कोई फार्मूला नहीं है।
टाइगर रिजर्व में बाघ, भालू, तेंदुआ समेत तमाम प्रजातियों के वन्यजीवों की संख्या में साल दर साल इजाफा हो रहा है। ऐसे में वन्यजीवों के रहने और खाने पीने की समस्या हो रही है। वन्यजीवों के बीच खासकर बाघों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर आए दिन जानलेवा घटनाएं सामने आती रहती हैं।
इन सभी का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नेशनल वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व समेत देश के सभी टाइगर रिजर्व में लैंडस्केप को और अधिक विकसित करने के साथ ही वन्यजीवों के लिए चारागाहों और जलस्रोतों को और अधिक विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास मुहैया हो, इसके लिए जारी दिशा निर्देशों के तहत कार्य कराए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत लैंडस्केप और ग्रासलैंड को विकसित करने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। वन एवं वन्यजीव के लिहाज से यह बेहद जरूरी है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में विचरण करता हिरन।- फोटो : PILIBHIT