बरसात का सीजन शुरू होते ही टाइगर रिजर्व के घने शाल के जंगल में पैदा होने वाला कटरुआ बाजार में आने लगा है। सीमावर्ती गांव के सैकड़ों मजदूरी पेशा लोग जंगल से कटरुआ लाकर उसे बाजार में बेंच रहे हैं। खाने में अति स्वादिष्ट व दुर्लभ होने के कारण इसके भाव भी आम सब्जियों से अलग हैं। बाजार में यह 160 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है।
सावन के महीने में शुरु होने वाली ये सब्जी (कटरुआ) जून में शुरू होती है। साल के पेड़ के नीचे जमीन से निकाल कर इसे लाया जाता है। जून में इसकी पैदावार काफी कम होती है। लिहाजा उस समय इसकी कीमत 500 रुपये से 800 सौ रुपये प्रति किलो तक रहती है। बारिश होने के साथ इसकी पैदावार में इजाफा होता जाता है। लिहाजा इस समय इसका भाव भी घट कर 150 से 160 रुपये किलो तक रह गया है। मार्केट में जहां तहां बिक रहा कटुरुआ इन दिनों सब्जी खाने वालों की पहली पसंद बन हुआ है। प्रति दिन शहर के बाजार में इसकी खपत दस क्विंटल तक होती है।
कटरुआ विक्रेता नरेश मौर्या व जितेंद्र कुमार बताते है कि कटरुआ बरसात की सीजन आते ही 15 जून से शुरु हो जाता है जिसकी शुरु में 800 रुपये किलो होती है। कटरुआ बाजार में 15 जून से 10 अगस्त तक बिकता है। एक दिन में लगभग 100 दुकानदार दस क्विंटल कटरुआ की बिक्री कर देते हैं। इस समय कटरुआ की कीमत 150 से 160 रुपये किलो है। जो अगस्त में 100 से 120 रुपये किलो रह जाएगी। विक्रेताओं ने बताया कि कटरुआ जमीन से निकलने के बाद दो दिन तक सही रहता है। इसके बाद वह सड़ने लगता है। कटरुआ पीलीभीत के माला, महोफ, दियोरिया, खटीमा रेंज आदि रेंजों में अधिक निकलता है। कटरुआ के बाजार में आने से यह साफ हो गया है कि टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद भी जंगल में लोगों की आवाजाही बंद नहीं हुई है। इससे टाइगर रिजर्व की सुरक्षा पर सवालिया निशान भी लग रहा है।
इस समय जंगल में पानी भरा हुआ है। जिले के बाजारों में बिकने वाले कटरुआ खटीमा समेत अन्य जंगलों से आते हैं।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ पीलीभीत टाईगर रिजर्व