वन विभाग के अधिकारी जंगल से अलग अमरिया तहसील क्षेत्र में लंबे समय से विचरण कर रहे बाघों को लेकर भले खुद को गंभीर बताएं, लेकिन अब तक की कार्रवाई निगरानी टीम से लेकर अफसरों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है। आए दिन एक ही फार्मर के खेत में बाघ की चहलकदमी का पता लग रहा है। इसके बावजूद बाघ को ट्रेस करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके है। महकमा बेसुध बना हुआ है, उधर ग्रामीणों के सामने खेती कर पाना ही मुसीबत बन गया है।
अमरिया तहसील क्षेत्र के सूरजपुर गांव निवासी परमवीर सिंह उर्फ पैरी के फार्म हाउस पर कई दिनों से बाघ की मौजूदगी का अहसास हो रहा है। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की ओर से निगरानी को लगाई गई टीम मौके पर आकर पड़ताल कर ग्रामीणों को अलर्ट करने तक सीमित है। इसके अलावा गजरौला गांव में भी अधिकतर एक ही फार्म पर बाघिन दिखाई देती है। ऐसे में यह तो स्पष्ट है कि बाघ और शावकों के साथ घूमने वाली बाघिन एक सीमित दायरे में विचरण कर रही है। बुधवार सुबह भी पैरी फार्म पर बाघ के पगचिह्न मिलने पर दहशत का माहौल बन गया। मजदूर खेत पर काम करने से बचते नजर आए। वन विभाग की निगरानी टीम के प्रभारी नवनीत यादव ने बताया कि सूचना मिलने पर वह पैरी फार्म पर वन दरोगा मुश्ताक अहमद, चेतन कुमार के साथ गए थे। खेत पर बाघ के पगचिह्न मिलने पर गांव के लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शासन से बाघों को पकड़ने के लिए अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने के बाद ही बाघों को पकड़ा जा सकेगा।