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Pilibhit News: बाघों की संख्या बढ़ी, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना चुनौती

Fri, 21 Mar 2025 12:19 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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पीलीभीत। प्राकृतिक सुंदरता और अनुकूल वातावरण के चलते बाघों की बढ़ती संख्या पीटीआर की देश-दुनिया में पहचान बढ़ा रही है। इस उपलब्धि के बीच जंगल की जमीन पर अतिक्रमण विभाग को दर्द भी दे रहा है। जंगल के सिकुड़ रहे दायरे की वजह से बाघ और इंसानाें में हो रही संघर्ष की घटनाएं रोकना भी विभाग के लिए चुनौती बना है। जंगल का दायरा न बढ़ने से संघर्ष रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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72 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले जिले के जंगल को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। जंगल के बेहतर वातावरण के चलते बाघ, तेंदुओं के अलावा अन्य वन्यजीवों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ, लेकिन संरक्षण के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके। संरक्षण की दिशा में चंद वॉच टॉवर, जलाशय बनाए।
बाघों की बढ़ती संख्या से पीटीआर को पर्यटन के रूप में पहचान तो मिली साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी सुर्खियां कम नहीं हो सकी। जंगल से बाहर निकलकर बाघ हमले कर रहे हैं। इस वजह से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इसको रोकने के लिए विभाग की ओर से जाल फेंसिंग से लेकर आमजन को जागरूक करने के प्रयास किए गए, लेकिन जंगल का दायरा न बढ़ने से यह नाकाफी साबित होते आए। वहीं, संसाधनों के साथ स्टाफ की कमी भी विभाग को परेशान कर रही है।
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कलीनगर में सर्वाधिक घटनाएं
जंगल क्षेत्र सिकुड़ने के चलते जंगल से दूर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे बाघ मानव पर हमलावर होने लगे हैं। इसमें कलीनगर तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक घटनाएं हुई। वर्ष 2024 की बात कर तो करीब छह लोगों की बाघ के हमले में मौत हुई। जनपद के कलीनगर, अमरिया, मझोला, पूरनपुर और गजरौला क्षेत्र में पांच-छह बाघों की अक्सर चहलकदमी बनी रहती है।

जंगल का दायरा बढ़े तो सुधरें हालात
वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद संख्या और बढ़ी, लेकिन जंगल का दायरा कम होने से नुकसान भी हो रहा है। मानव के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है। पूर्व में इंसानों के साथ बाघों की मौतें होती रही। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू सेंटर का निर्माण तेज होना चाहिए। इसके साथ ही जंगल का दायरा बढ़ने पर भी गंभीरता से अमल करने की जरूरत है। विभाग के आंकड़ों में 15 सौ हेक्टेयर पर अवैध कब्जे हैं।
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वर्जन :
पीटीआर की 15 सौ हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। विभाग की ओर से लगातार पैरवी भी की जा रही है। - मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर
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