पीलीभीत। दहशत का पर्याय बन चुके बराही रेंज के बाघ ने बुधवार को गोमती गुरुद्वारे के पीछे पहुंचकर डेरा जमा लिया। यह स्थान असम हाईवे और गुरुद्वारे से महज 300 मीटर की दूर है। निगरानी टीम लगातार बाघ के पीछे लगी हुई है। रिहायशी इलाके में बाघ की मौजूदगी से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों की रोजाना ही निगरानी टीम में लगे अफसरों और वनकर्मियों से झड़पें भी हो रही है। इन बिगड़े हालातों की जानकारी के बाद भी शासन स्तर से बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बाघ को रिहायशी इलाके में घूमते हुए बुधवार को पूरे 52 दिन हो चुके हैं, मगर इस मामले में अभी तक स्थानीय वन अफसर शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल बाघ की बढ़ती चहलकदमी को देखते हुए वन अफसरों ने पिछले सप्ताह फील्ड डायरेक्टर के माध्यम से शासन स्तर से बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी थी, मगर अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी है। ऐसे में स्थानीय वन अफसरों के सामने बाघ को पिंजड़े में कैद करने या उसे जंगल की ओर खदेड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। इधर अब इस लेटलतीफी का खामियाजा किसी बड़े टकराव की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। पिछले सप्ताह बाघ की निगरानी में लगे वन अफसरों और वनकर्मियों को स्थानीय लोगों के गुस्से का शिकार भी होना पड़ा था। यह सिलसिला अभी भी जारी है। यदि जल्द ही इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया तो कभी भी इस इलाके में संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल स्थानीय वन अफसरों के लिए रिहायशी इलाके में घूम रहा बाघ सिरदर्द बनता जा रहा है।
मंगलवार देर शाम बाघ ने पूरनपुर क्षेत्र में असम हाईवे के किनारे ढाबे के करीब दस्तक देकर दहशत फैला दी थी। इसके बाद बाघ ओझल हो गया था। बुधवार सुबह करीब छह बजे बाघ ने गोमती गुरुद्वारा के पीछे गन्ने के खेत में डेरा जमा लिया। इससे आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलतेे ही सामाजिक वानिकी पूरनपुर रेंजर अयूब हसन, ततीर अहमद, कंधईलाल, सुरेश मौर्य, नवीन सिंह बोरा, विशाल सिंह मौके पर पहुंचे। निगरानी टीम के मुताबिक बाघ गोमती गुरुद्वारा और असम हाईवे से करीब 300 मीटर दूरी पर बैठा हुआ है। बाघ की मौजूदगी से स्थानीय लोगों में खासी दहशत है।