माधोटांडा/पीलीभीत। टाइगर रिजर्व प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी कोर एरिया से सटे शारदा डैम के दस किमी इलाके तक के नरकुल को एक बार फिर नीलाम कर दिया गया। बाघों और तेंदुओं की सुरक्षा का हवाला देकर तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर ने सिंचाई विभाग से नीलामी रोकने के लिए पत्राचार भी किया था। बावजूद इसके इस बार नीलामी धनराशि बढ़ाकर 81 हजार में नरकुल को नीलाम कर दिया गया।
टाइगर रिजर्व की बराही और महोफ रेंज से सटा 22 किमी लंबा शारदा डैम है। डैम के जीरो से दस किमी क्षेत्र में नरकुल फैला हुआ है। यह इलाका बाघों और तेंदुओं के विचरण के लिए सर्वाधिक सुरक्षित माना जाता है। विशाल नरकुल होने से तृणभोजी वन्यजीवों की चहलकदमी के चलते बाघों की इस इलाके में अधिक मौजूदगी बनी रहती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में घास चरने पहुंचने वाले पालतू मवेशी भी बाघ का निवाला बनते रहे हैं। इधर, सिंचाई विभाग की ओर से डैम में फैले नरकुल को एक बार फिर नीलाम कर दिया गया। ऐसे में नरकुल कटान की आड़ में वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है।
सख्ती के बाद भी कटता रहा नरकुल
पूर्व में नीलाम होते ही नरकुल का सफाया शुरू हुआ तो मामला अखबारों की सुर्खियां बना। जिसपर गंभीर हुए टाइगर रिजर्व के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने वन्यजीवों की चहलकदमी का हवाला देकर नरकुल का कटान रोकने को शारदा सागर खंड के अफसरों को पत्र लिखा था। इसके बावजूद भी नरकुल का कटान नहीं रुका तो डिप्टी डायरेक्टर ने कटान करते पकड़े जाने पर विभागीय कार्रवाई करने के वनकर्मियों को आदेश दिए थे।
नरकुल के नीलामी की अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है। कोर जोन से सटे इलाके की पूरी स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व