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बंदोबस्त अधूरे पर अनुकूल वातावरण ने बढ़ा दी बाघों की संख्या

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पीलीभीत। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच नहरों का जाल पीलीभीत के जंगल को ब्रिटिशकाल से ही पहचान दिलाए है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद भले ही यहां बाघों के संरक्षण के लिए संसाधन विकसित किए गए हों, लेकिन बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों के लिए पीलीभीत का जंगल हमेशा से मुफीद रहा है। यही वजह है कि 2014 की गणना में जहां बाघों की संख्या 44 थी वहीं वर्तमान में इनकी संख्या 70 के आसपास होने का अनुमान है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े आने में अभी दो-तीन दिन का समय लगना बताया जा रहा है। पांच वर्षों में करीब 10 बाघ मरे भी हैं। इनमें दो शावक शामिल हैं।
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अब तक मरने वाले बाघों की सूची
- 16 अक्तूबर 2014 महोफ रेंज के फैजुल्लागंज में बाघ का सब आप की संगत में हुई
थी मौत ।
- 23 अप्रैल 2015 जगह के पास हरदोई ब्रांच नहर में मिला था बाघ का शव
- 12 जुलाई 2017 कोटा रेंज के हरदोई ब्रांच में डूबने से हुई थी बाघिन की मौत ।
- 23 अक्टूबर 2017 माला रेंज में मिले थे दो बाघ शावकों के शव- 29 मार्च 2018 शारदा सागर डैम में उतरता हुआ मिला बाघ का शव
- 11 अप्रैल 2018 बराही के अंतर्गत रजबहा पटरी पर मिला बाघ का शव
- 19 अप्रैल 2018 महोफ में मिला बाघ का शव
- 20 मई 2018 रजबहा खारजा नहर की पटरी पर मिला बाघ का क्षतविक्षत शव ।
- 31 जुलाई 2018 बॉर्डर क्षेत्र के बाजार घाट सुतिया नाला में मिला था बाघ का
सड़ा गला शव ।
- 25 जुलाई 2019 पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के मटेहना में ग्रामीण और बाघ के बीच संघर्ष में बाघ की मौत
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