हरदोई ब्रांच
की झाल में मिला बाघ का शव आखिर कहां से आया वन विभाग अब तक यह तय नहीं कर
पाया है। दो दिन से घटना स्थल और इसके आसपास हुई कांबिंग में बाघ के
पगमार्ग अथवा कोई और पहचान चिन्ह नहीं मिले हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि
क्या बाघ पानी में बहकर यहां आया था अथवा कहीं से लाकर यहां डाला गया है।
बृहस्पतिवार
को बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर के दो मील स्थित झाल में
मिले बाघ की मौत का राज खोलना तो दूर विभाग उनके यहां पहुंचने की जानकारी
जुटाने में भी नाकाम रहा है। नहर में मिले बाघ का शव देख यह प्रतीत हो रहा
था कि इसकी मौत कुछ समय पहले ही हुई थी उसका पूरा शरीर व अंग सुरक्षित थे।
यदि बाघ का शव पुराना होता तो काफी गला सड़ा होना चाहिए था। इससे वनाधिकारी
बाघ के घटना स्थल के आसपास से ही आने की उम्मीद लगा रहे थे और इसकी बिंदु
को केंद्र में लेकर जांच चल की जा रही है। 56 घंटे से अधिक समय से महोफ और
बराही रेंज का स्टाफ घटना स्थल, आसपास के खेत और दोनों वन रेंजों में ग्रुप
बनाकर कांबिंग कर रहे हैं लेकिन शनिवार शाम तक बाघ के कोई पदचिन्ह अथवा
संदिग्ध चीज नहीं मिली है जो बाघ की मौत की कड़ी को जोड़ती हो।
विभाग सिर्फ
संभावनाओं पर काम कर रहा है। घटना के तीसरे दिन भी कोई क्ल्यू न मिलने से
अधिकारी भी सकते हैं। शनिवार को सुबह टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी के
वनाधिकारी व कर्मचारियों ने खेतों के साथ साथ हरदोई नहर से कुछ दूर बह रही
ओसी (खारजा) नहर की दोनों पटरियों पर भी कांबिंग की लेकिन कहीं कुछ नजर
नहीं आया।
वहीं पिछले साल हुई कैमरा ट्रैपिंग के मिलान से इसके किशनपुर
सेंचुरी के होने की संभावना व्यक्त की गई थीं। यदि वनविभाग इसे सही मान रहा
तो क्या बाघ किशन सेंचुरी से चलकर यहां आया अथवा उसे यहां लाकर डाला गया
है।
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बाघ की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद
ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल जंगल में कांबिंग कराकर सुराग तलाश किया जा रहा
है। बाघ यहां तक कैसे पहुंचा यह भी जल्द पता कर लिया जाएगा।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, टाइगर रिजर्व