पीलीभीत। ट्रैंक्युलाइज किए गए बाघ की मौत के मामले में टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की। अधिकारी बाघ की मौत की वजह शिकार को लेकर होने वाले संघर्ष के कारण लगी चोटों को बता रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों ने कहा कि बाघ न तो भूखा था, न ही उसे गोली मारी गई थी। पीएम रिपोर्ट में बाघ की चोटें 15 से 20 दिन पुरानी निकली हैं।
गजरौला क्षेत्र के जराकोठी-शिवनगर लिंक मार्ग पर तीन लोगों को हमला कर घायल करने वाले बाघ को रविवार को टैंक्युलाइज कर पकड़ लिया गया था। परीक्षण के दौरान उसकी गर्दन समेत अन्य स्थानों पर तीन चोटें पाई गईं। इलाज के दौरान रविवार शाम 6:40 बजे बाघ की मौत हो गई। बाघ की मौत ने टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को घेरे में खड़ा कर दिया। वन्यजीव प्रेमियों ने बाघ के भूखा होने और उसे गोली लगने की आशंका जताई थी। बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उसके पेट में सुअर का मांस होने की पुष्टि हुई है। वहीं एक्स-रे और मेटल डिटेक्टर में गनशॉट का कहीं नामोनिशान नहीं मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेें चोटें भी 15 से 20 दिन पुरानी होने की बात सामने आई है। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि शिकार के दौरान संघर्ष में ही बाघ को चोटें आई होंगी। पुरानी चोट होने से उसके घाव में कीड़े भी पड़ गए थे। रिपोर्ट में बाघ की एक पसली टूटने की पुष्टि भी हुई है। इधर टाइगर रिजर्व के अधिकारी अब इस बात की जांच में जुटे हैं कि बाघ से संघर्ष की घटना कहां और कब हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ के शरीर में कहीं गनशॉट नहीं पाया गया। उसके शरीर पर लगी चोटें भी 15 से 20 दिन पुरानी थीं। ऐसा लगता है कि शिकार के समय किसी जानवर से संघर्ष में बाघ को चोटें लगी हैं। फिलहाल इस मामले में जांच की जा रही है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व