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Pilibhit News: पीटीआर के जंगल में मवेशियों के झुंड पर बाघ का हमला, बछड़े को बनाया शिकार

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जंगल में डेरा जमाय बैठे मवेशी। संवाद
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गोशाला की व्यवस्था न होने पर फसल बचाने के लिए छोड़ रहे मवेशी, बन रहे वन्यजीवों का निवाला
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कलीनगर। तराई क्षेत्र में छुट्टा और पालतू मवेशियों की बढ़ती संख्या अब उनके लिए ही खतरा बनती जा रही है। किसानों की तरफ से फसलों को बचाने के लिए छोड़े गए मवेशियों ने शारदा डैम किनारे स्थित टाइगर रिजर्व के जंगल को ही अपना ठिकाना बना लिया है। रविवार सुबह जंगल से निकले बाघ ने एक गाय के बछड़े को अपना निवाला बना लिया।
शारदा डैम के जीरो किलोमीटर क्षेत्र से लेकर आबादी से सटे जंगल किनारे तक बड़ी संख्या में तीन माह से मवेशी देखे जा रहे हैं। इनमें गाय, बैल, बछड़े और सांड शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस समय खेतों में धान समेत विभिन्न कृषि और सब्जी की फसलें खड़ी हैं। मवेशियों के झुंड फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे परेशान होकर कई पशुपालक और ग्रामीण उन्हें जंगल व नदी किनारे छोड़ देते हैं।
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रविवार सुबह करीब नौ बजे एसएसबी की चौकी से कुछ दूरी पर टाइगर रिजर्व के जंगल से निकले बाघ ने मवेशियों के झुंड पर हमला कर दिया। बाघ ने एक गाय के बछड़े को दबोच लिया। आसपास के दुकानदारों और ग्रामीणों ने शोर मचाकर बाघ को भगाने का प्रयास किया। लोगों के पहुंचने पर बाघ बछड़े को छोड़कर जंगल की ओर चला गया। सूचना मिलने पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे और मृत बछड़े को जंगल किनारे रेत में गड्ढा खोदकर दफना दिया।
क्षेत्रीय इंचार्ज अजीत वर्मा ने बताया कि हमला करने वाला बाघ था। कुछ स्थानीय लोग इसे तेंदुआ बता रहे थे, लेकिन मौके की जानकारी के आधार पर वनकर्मियों ने इसे बाघ का हमला बताया।

दो झुंड आबादी की ओर खदेड़े, फिर जंगल में लौटने का खतरा
घटना के बाद वनकर्मियों ने जंगल में डेरा जमाए मवेशियों के दो झुंडों को आबादी की ओर खदेड़ दिया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन मवेशियों के लिए सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था नहीं हुई तो रात में उन्हें फसलों से दूर रखने के लिए फिर जंगल की ओर हांक दिया जाएगा। ऐसे में उनके दोबारा जंगल में पहुंचने का खतरा बना रहेगा। संवाद

सीमावर्ती गांवों में तेंदुए की चहलकदमी बढ़ी
कलीनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र के नौजल्हा नकटहा और बूंदीभूड़ गांव में पिछले कई दिनों से तेंदुए की चहलकदमी बढ़ गई है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब एक सप्ताह से जंगल से निकलकर तेंदुआ रात के समय आबादी में पहुंच रहा है और घरों में घुसकर मुर्गे-बत्तख समेत छोटे मवेशियों को अपना निवाला बना रहा है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है।
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ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुआ अब तक ज्योति बैरागी के घर में घुसकर मुर्गा, जय मंडल के घर से बत्तख, मनिया के घर से भी बत्तख उठा ले गया। वहीं, बूंदीभूड़ गांव में भला सरकार के घर से चार और सुबोध सरकार के घर से पांच बत्तख भी गायब हो गई। इसके अलावा एक बछड़े पर भी हमला किया गया। संवाद
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