एक ओर शारदा नदी तो दूसरी ओर नेपाल की वमनी नदी। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से इन दिनों शारदा पार बसी आबादी जूझ रही है। ऐसे में शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान व ढकिया ताल्लुके महाराजपुर टापू जैसे बन गए हैं। इन इलाकों में आवागमन का मात्र एक साधन शारदा नदी पर नाव है। रोजाना कई लोग नाव से ही नदी पार कर खेती करने जा रहे हैं।
शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान व ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव पड़ते हैं। जहां सैकड़ों एकड़ भूमि पर लोग खेती कर रहे हैं। यहां एक ओर शारदा नदी है। इस इलाके में नदी की चौड़ाई लगभग ढाई से तीन किमी है। नदी की चौड़ाई अधिक होने से बीच-बीच में रेत के ढेर दिखाई दे रहे हैं। शारदा नदी पार जाने का एक मात्र साधन नाव है। इन दिनों धान की रोपाई आदि का कार्य चल रहा है। ऐसे में रोजाना ही कई ग्रामीण नावों के जरिए ही शारदा पार पहुंचते हैं। नदी की चौड़ाई अधिक होने के कारण नाविक को नाव को लंबी दूरी तय कर ले जाना पड़ रहा है। बताते हैं कि वापसी के दौरान नाव में क्षमता से अधिक सवारी बैठ जाती हैं। जिससे हर समय दुघर्टना होने की संभावना बनी रहती है।
इधर इस इलाके के दूसरे किनारे पर नेपाल की वमनी नदी बहती है। जो भारत नेपाल सीमा के पिलर नंबर 28 केनिकट से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर शारदा में गिरती है। इस नदी का जलस्तर का वेग शारदा नदी के जलस्तर से काफी तेज होता है। इससे नाव संचालन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस इलाके के एक छोर पर नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी व चौहदर नदी बहती है। इस तरह यह इलाका हर साल की तरह करीब छह माह के लिए टापू बन जाता है। बाढ़ विभीषिका झेलना इस इलाके की मजबूरी बनी हुई है। लोग अपनी जरूरत की चीजें शारदा नदी के सहारे नाव से आकर खरीद कर ले जाते हैं। प्रशासन भी शारदा पार बाढ़ नियंत्रण के ठोस उपाय नहीं कर सका है। बाढ़ के समय कई दिन तक इस टापूनुमा इलाके का संपर्क दूसरे इलाको से कटा रहेगा।