इस बार चुनावी दंगल में नहीं दिखेंगे बीके गुप्ता
1989 के चुनाव के बाद यह पहला मौका होगा जब पूर्व विधायक बीके गुप्ता शहर में रहते हुए भी चुनावी दंगल में नहीं आएंगे। दरअसल गले में कैंसर के चलते उनका इलाज चल रहा है, लिहाजा उन्होंने चुनाव लड़ने के बजाय घर पर आराम करना बेहतर समझा है। बीके गुप्ता पहली बार 1988 में नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का चुनाव लड़े थे। यह चुनाव हार गए लेकिन 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट दे दिया। इस चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रहे थे। भाजपा के टिकट पर 1991 में फिर चुनाव लड़े और जीतकर विधायक बने। 1993 में उन्होंने जीत को दोहराया। 1996 में भाजपा ने राजराय सिंह को चुनाव मैदान में उतारा तो बीके गुप्ता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े मगर हार गए। इसके बाद बीके गुप्ता 2002 और 2007 में भाजपा और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इस चुनाव में भी बीके गुप्ता भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार थे। तैयारियां भी कर ली थीं और तीन माह पहले राजनाथ सिंह से मिलकर आए थे। परिवर्तन यात्रा से पहले शहर में हर जगह उनके होर्डिंग्स दिखाई देने लगे थे लेकिन परिवर्तन यात्रा से चंद दिन पहले गले में कैंसर से उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इस पर उन्होंने खुद अपनी दावेदारी वापस ले ली। दिल्ली में उपचार कराने के बाद बीके गुप्ता अब घर पर आराम कर रहे हैं।