तराई के इलाके में इस बार विकास बड़ा मुद्दा होगा। हाल ही में कलीनगर में तहसील, माधोटांडा में ब्लॉक और शारदा नदी पर मार्जिनल बांध के निर्माण की लड़ाई जीतने के बाद इस इलाके के वोटर को अपनी ताकत का एहसास हुआ है। कई और मुद्दों की लंबी फेहरिस्त उसके हाथों में है। माना जा रहा है कि इस बार उनका वोट हमेशा की तरह झूठे वादों पर नहीं मिलेगा बल्कि उनका भरोसा जीतना पड़ेगा। यह देखने वाली बात होगी कि कौन इसमें कामयाब होता है। माधोटांडा के तराई इलाके के मतदाता जमाने से राजनीतिक दलों के हाथों बेवकूफ बनते आ रहे हैं। हर बार चुनाव में उन्हें झूठे वादों का टोकरा थमाकर वोट झटक लिए जाते थे। दशकों बाद भी माधोटांडा में ब्लॉक और कलीनगर में तहसील बनाने की उनकी मांग पूरी होने में नहीं आ रही थी। लंबे संघर्ष के बाद इसी साल उनकी ये मांगें पूरी हुईं तो ये मतदाता एक नए विश्वास से भर गए हैं। विकास के मुद्दों पर एकजुट होने का संकल्प उनमें साफ दिख रहा है। इन वोटरों में तलहटी की कॉलोनियों में बसे 24 हजार बंगाली मतदाता भी हैं।
गभिया के पूर्व प्रधान शंकर राय, महाराजपुर की प्रधान आशा मिस्त्र और रमनगरा के भूदेव दास कहते है कि इस बार उनका वोट उसी को जाएगा जो उन्हें विकास कराने का पक्का भरोसा दिलाएगा। वे कहते हैं कि यहां नदी पर तटबंध बनना बहुत जरूरी है ताकि हर साल होने वाली तबाही पर अंकुश लग सके। विद्युतीकरण से वंचित गांवों में बिजली पहुंचाई जाए। तहसील मुख्यालय से नेपाल सीमा तक सड़क के बनना भी बहुत जरूरी है क्योंकि इससे 30 किमी लंबे क्षेत्र के सभी गांवों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। नागरिकता के मामलों का हल किया जाना भी जरूरी है।