माधोटांडा स्थित सीएचसी का भवन । संवाद
गंभीर स्थिति बताकर भेज दिया जाता निजी अस्पतालों में
संवाद न्यूज एजेंसी
कलीनगर। संस्थागत प्रसव बढ़ाने के दावों के बीच महिला चिकित्सक की कमी की आड़ में गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में भेजने के मामले बढ़ गए हैं। यही नहीं महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण स्टाफ नर्स प्रसव करा रहीं हैं।
माधोटांडा सीएचसी का क्षेत्र नेपाल सीमा तक फैला हुआ है। आशाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाएं माधोटांडा सीएचसी में उपचार कराने आती है। सुविधाओं की बात करें तो सीएचसी पर एक भी महिला चिकित्सक नहीं है। जरूरत के हिसाब से स्टाफ नर्स ही परामर्श देती हैं।
मरीज पर्चा लेकर बाहर मेडिकल स्टोर पर दौड़ लगाते हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को पूरनपुर जाना पड़ता है। वहीं प्रसव का समय नजदीक आने पर भी कम महिलाओं को सुविधा मिल पाती है। अंतिम समय में गंभीर स्थिति बताकर निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इसमें आशाओं की अहम भूमिका रहती है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्सक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि महिला चिकित्सक की कमी के संबंध में अफसरों को जानकारी है।