पीलीभीत। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में खून का अभाव है। ब्लड बैंक में पॉजिटिव ग्रुप का क्षमता से सिर्फ 10 प्रतिशत खून और निगेटिव ग्रुपों के खून की उपलब्धता शून्य है। ऐसे में रोजाना जिला अस्पताल में सर्जरी, गर्भवती महिलाओं सहित भर्ती मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने जिले के समाजसेवियों और रक्तदाताओं से रक्तदान की अपील की है।
मेडिकल कॉलेज बनने से जिला अस्पताल में संसाधनों में तो इजाफा हुआ। मगर सुविधाएं सिर्फ कागजों में दौड़ रही हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में नई मशीनें लगाई गई हैं। ब्लड बैंक के स्टोर में सुरक्षित खून में तापमान सामान्य रखने को कई बड़े फ्रीजर लगाए गए। 24 घंटे बिजली की व्यवस्था की गई। ब्लड बैंक में संसाधन तो सभी पूरे कर लिए गए, लेकिन रक्त की कमी है। ब्लड बैंक में सामान्यत: 500 यूनिट रक्त रखने की क्षमता है। मगर शुक्रवार को ब्लड स्टोर में ए-पॉजिटिव ग्रुप का 11 यूनिट, बी-पाॅजिटिव का 26 यूनिट, एबी पॉजिटिव का नौ यूनिट और ओ-पॅाजिटिव का छह यूनिट सहित कुल 52 यूनिट रक्त मौजूद था। वहीं निगेटिव ग्रुप में ए व बी के शून्य व एबी निगेटिव, ओ निगेटिव में कुल दो यूनिट रक्त शेष है। ऐसे में क्षमता के अनुसार ब्लड बैंक में मात्र दस प्रतिशत रक्त ही मौजूद है। निगेटिव ग्रुप के मरीजों के तीमारदार खून के लिए भटक रहे हैं।
संक्रामक बीमारियों का मौसम करीब, कैसे मिलेगा प्लाजमा
जून से नवंबर तक डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियां अधिक पांव पसारती हैं। इसमें शरीर में प्लेटलेट्स कम हो जाते है। मजबूरन मरीज को प्लेटलेट्स की आवश्यकता पड़ती है। ब्लड बैंक में खून का अभाव है, इससे जरूरत के अनुसार प्लाजमा तैयार होना मुश्किल है।
एक यूनिट ब्लड से बनता है प्लेटलेटस, प्लाजमा व पीआरवीसी
एक यूनिट में 350 एमएल रक्त होता है। एक यूनिट से पीआरवीसी, प्लेटलेट्स व प्लाज्मा के तीन यूनिट तैयार किए जाते हैं। सामान्यता खून की मांग पर जरूरतमंद को पीआरवीसी, डेंंगू में प्लेटलेट्स व जलने पर प्लाजमा उपलब्ध कराया जाता है।
एक माह में एक से दो रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। साथ ही विशेष दिवसों पर शिविर लगाकर मिले रक्त को स्टोर किया जाता है। साथ ही माइनर ब्लड ग्रुप डोनेटरों की सूची भी बनाई गई है। गर्भवती महिलाओं व जरूरतमंदों को बैंक से रक्त मिलने में परेशानी न हो, इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. विभूति गोयल, विभागध्यक्ष पैथोलॉजी