प्री मानसून आ चुका है। शहर के तमाम नाले और नालियां अभी भी चोक पड़े हैं। खास बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन ने इस बार शहर के 28 नालों में से मात्र सात बड़े नालों की सफाई का ठेका दिया है। शेष बचे नालों की सफाई पालिका अपने स्तर से करवा रही है। शहर में चल रहे नाला सफाई के कार्य को देखकर इसमें खानापूरी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
नौ लाख से हो रही है नालों की साफ सफाई
शहर के करीब 28 छोटे-बड़े नाले हैं। पालिका प्रशासन वैसे तो अमूमन हर साल ही सभी नालों की सफाई का ठेका देता है, लेकिन इस बार मुख्य नाला समेत मात्र सात नालों की सफाई का ठेका दिया गया है। यह कार्य करीब नौ लाख रुपये से कराया जा रहा है।
महज चार नालों की ही हुई सफाई
पालिका प्रशासन के मुताबिक सात नालों में से चार नालों की सफाई हो चुकी है। इसमें चार किमी लंबे क्षेत्र में फैले मुख्य नाले की सफाई का कार्य पूरा होना बताया जा रहा है, लेकिन इस नाले को देखकर अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि इस नाले की सफाई हो चुकी है। पुलियों के पास नाले के भीतर इक_ा मलवा व जगह जगह उतराता बड़ी तादाद में कूड़ा इसकी सफाई गुणवत्ता पर प्रश्रचिन्ह लगाता नजर आ रहा है। खास बात यह है कि पूरे शहर के पानी निकास का दारोमदार इसी मुख्य नाले पर हैं।
नाला सफाई पर उठ रहीं ऊंगलियां
नाला सफाई की स्थिति पर गौर करें तो सफाई के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। जो नाले साफ हो चुके हैं, उनमें से कुछ नाले अभी भी कूड़े से पटे पड़े हैं, जबकि पालिका प्रशासन यहां सफाई होने का दावा कर रहा है। बानगी के तौर पर पीसीएफ गोदाम के समीप नाले को देखे तो यहां सफाई हो चुकी है, लेकिन नाले के भीतर अब भी कूड़े के बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं।
मानसून की संभावना के चलते पूर्व में टेंडर कर नालों की सफाई तेजी से शुरू करा दी गई थी। अधिकतर कार्य निपट चुका है। शेष अन्य नाले पालिका अपने स्तर से साफ करवा रही हैं। निर्धारित समय के भीतर ही सफाई कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
- वीपी सिंह, अधिकारी अधिकारी, नगर पालिका