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गैंडा परियोजना की कवायद फिर ठंडी

Sun, 07 Feb 2016 07:57 PM IST
पीलीभीत
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यहां टाइगर रिजर्व बनने के बाद गैंडा परियोजना की कवायद जिस तेजी के साथ शुरू की गई थी, अब समय के साथ उसमें धीमापन आ गया है। यह हाल तब है, जब परियोजना के लिए 1250 एकड़ भूमि का चयन भी किया जा चुका है। खास बात यह है कि दुधवा पार्क में अलग से एक और गैंडा परियोजना लागू की जा रही है।
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टाइगर रिजर्व की अधिसूचना के बाद यहां कई मामलों में काफी तेजी आई थी। इसी के चलते वन से सटे इलाकों की जनता वन से अपना अधिकार छिनने के चलते टाइगर रिजर्व का विरोध कर रही थी, लेकिन प्रदेश सरकार के दबाव में ग्रामीणों की सहमति लेने के लिए जिला प्रशासन को आगे आना पड़ा था। गांवों में खुली बैठकें कर सहमति पत्र के प्रस्ताव आनन फानन में शासन को भेजे गए थे। तब जाकर टाइगर रिजर्व को अमली जामा पहनाया जा सका था।

मंत्रियों और मुख्य सचिव ने की थी घोषणा
टाइगर रिजर्व बनने के बाद प्रदेश के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हाजी रियाज अहमद, राज्यमंत्री फरीद महमूद किदवई, मुख्य सचिव आलोक रंजन ने जनपद दौरे के समय गैंडा परियोजना लागू करने की घोषणा की थी। कहा था कि जल्द ही असम के काजीरंगा से गैंडों को यहां लाकर बसाया जाएगा।
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परियोजना को 1250 एकड़ जमीन का चयन
मंत्रियों और मुख्य सचिव की घोषणा के बाद टाइगर रिजर्व के अफसरों जंगल में भूमि की तलाश शुरू कर दी थी। यहां नेपाल से सटी शुक्ला फांटा सेंच्युरी से भी गैंडे आते रहते हैं। ऐसे में महोफ रेंज के कंपार्टमेंट मैनाकोट दो में 1250 एकड़ भूमि का चयन किया गया। उस दौरान अफसरों की तेजी से यह लग रहा था कि अब यहां शीघ्र ही गैंडा परियोजना लागू हो जाएगी, लेकिन अब यह तेजी गुम हो चुकी है। अधिकारी भी इसमें कुछ अधिक कहने को तैयार नही हैं। हालांकि दुधवा पार्क में अलग से एक और गैंडा परियोजना लागू की जा रही है।

बराही जंगल से सटे महोफ रेंज के मैनाकोट कंपार्टमेंट दो में 500 हेक्टेयर भूमि का चयन कर प्रस्ताव भेजा गया था। अभी तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत हुआ तो यहां जल्द गैंडा परियोजना लागू की जा सकेगी।
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केपी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी महोफ
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