पीलीभीत। मनरेगा में आए दिन बिना काम के ही श्रमिकों को भुगतान करने के मामले सामने आते रहते हैं। इस बार तो जिम्मेदारों ने हद ही कर दी। 13 सितंबर को भयंकर बारिश और बाढ़ से जनजीवन प्रभावित था तो उस दौरान गांवों में मनरेगा के तहत 1076 श्रमिकों से काम कराना मस्टररोल में दर्ज करा दिया गया। मामला खुलने पर अब मनरेगा लोकपाल ने उपायुक्त से सचित्र रिपोर्ट मांगी गई है।
गांव के लोगोेंं को रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना चल रही है। इसमें प्रतिदिन एक श्रमिक को 237 रुपये दिए जाते हैं। गांवों में मनरेगा योजना में घपलेबाजी को लेकर अक्सर शिकायतें होती रहती हैं। इस बार तो योजना के नाम पर जिम्मेदारों ने कमाल ही कर दिया। 13 सितंबर को जब जिले में भयंकर बारिश हो रही थी, लोगों का घर से निकलना तक दूभर था, ऐसे में जिले के सभी ब्लॉकों में 1076 मनरेगा श्रमिकों से काम करवाया जा रहा था, जो मस्टररोल में दर्ज है। काम कितना हुआ यह भी दर्शाया गया है।
भारी बारिश में सभी ब्लॉकों में कराए गए कार्यों का विवरण देखकर मनरेगा लोकपाल भी दंग रह गए हैं। मनरेगा में घपलेबाजी होने की आशंका पर उन्होंने डीसी मनरेगा वंदना सिंह से सभी ब्लॉकों में दर्ज श्रमिकों की संख्या लिखकर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। हालांकि अभी इसकी रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। ऐसे मेें घपलेबाजी की आशंका बढ़ गई है। (संवाद)
भारी बारिश में पूरनपुर ब्लॉक में हुआ सबसे अधिक काम
13 सितंबर को भयंकर बारिश में सर्वाधिक श्रमिकों से काम पूरनपुर ब्लॉक में कराया गया। उस दिन यहां पर 525 श्रमिकों ने काम किया था। वहीं दूसरे नंबर पर बीसलपुर ब्लॉक रहा। यहां 251 श्रमिकों से काम कराया गया। इसके अलावा बिलसंडा में 162 श्रमिक काम करते दर्शाए गए हैं। वहीं मरौरी में 46, ललौरीखेड़ा में छह ओर अमरिया में 33 श्रमिक काम करते मस्टररोल में दर्शाए गए हैं।
13 सितंबर को भयंकर बारिश हो रही थी। लोग घर से नहीं निकल पाए थे। ऐसे में जिले के सभी ब्लॉकों में 1076 श्रमिकों से मनरेगा के तहत काम कराया गया है। इसमें बड़े घपलेबाजी की आशंका है। इसको लेकर डीसी मनरेगा से फोटो के साथ रिपोर्ट मांगी गई है। -जीएल वर्मा, मनरेगा लोकपाल