दूसरे चरण के मतदान के दौरान अमरिया ब्लाक के गांव नवादाकंजा के ग्रामीणों ने मतदान केंद्र बदलने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने एक सत्ताधारी नेता के इशारे पर प्रशासन द्वारा गुपचुप तरीके से मतदान केंद्र बदलने का आरोप लगाया। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को मनाने की दिन भर चली कोशिशों के बाद भी ग्रामीण शाम तक मतदान न करने की बात पर अड़े रहे।
दूसरे चरण के मतदान के दौरान अमरिया ब्लाक का गांव नवादाकंजा मंगलवार पूरे दिन खासा चर्चाओं में रहा। गांव नवादाकंजा प्राथमिक विद्यालय स्थित मतदान केंद्र पर सोमवार शाम पोलिंग पार्टी पहुंची थीं, लेकिन देर शाम पहुंची जहानाबाद पुलिस ने पोलिंग पार्टी को मतदान केंद्र गलत स्थान पर बनना बताते हुए ग्राम पंचायत के मजरा वाकरगंज में मतदान केंद्र होना बताया। रात में ही पोलिंग पार्टी सारा सामान समेट वाकरगंज पहुंच गई। इधर मतदान केंद्र बदलने की भनक लगते ही नवादाकंजा के ग्रामीणों ने देर शाम ही हंगामा करना शुरू कर दिया। इधर, मंगलवार सुबह होते ही तमाम ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय में एकत्र हुए और मतदान का बहिष्कार करने का एलान कर दिया। मतदान बहिष्कार की भनक लगते ही प्रशासन हरकत में आ गया। जोनल मजिस्ट्रेट एके दुबे, एसडीएम सदर सुरेंद्र बहादुर, एसडीएम बीसलपुर वीपी सिंह, सीओ सुबेग सिंह सिद्धू समेत तमाम अन्य अधिकारी एक-एक कर गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर मनाने का प्रयास किया, लेकिन प्राथमिक स्कूल में ही धरने पर बैठे ग्रामीण मतदान न करने की बात पर शाम तक अड़े रहे। ग्रामीणों का कहना था कि चुनाव से दो तीन पूर्व तक यहां अधिकारी मतदान केंद्र चेक करने आते रहे, वोटिंग को लेकर बांस बल्लियां भी लगाई गई, लेकिन ऐन वक्त पर पोलिंग बदलना साजिश का ही नतीजा है।
पुलिस पर लगाया धमकाने का आरोप
नवादाकंजा के ग्रामीणों ने पुलिस पर धमकाने का भी आरोप लगाया। ग्रामीणों ने बताया कि रात आए एक थाना प्रभारी ने वाकरगंज में जाकर वोट डालने की बात कही। ज्यादा शोर शराबा करने पर जेल में बंद करने की धमकी दी।
अधिकारियों को नहीं पता कहां पड़े थे वोट
नवादाकंजा पहुंचे जोनल मजिस्ट्रेट ने बीडीओ से पिछले पंचास्थानि चुनाव कहां पर हुए थे की जानकारी की तो उन्होंने वाकरगंज में वोट पड़ना बताया। इस मौजूद भीड़ ने इसे गलत करार दिया।
भले हार जाऊं, लेकिन वोट नहीं डालूंगा
नवादाकंजा निवासी सेवाराम बीडीसी प्रत्याशी है। अधिकारियों ने उन्हें भी मनाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि भले हार जाऊं, लेकिन वोट वाकरगंज डालने नहीं जाऊंगा।
इस बार वोट करो अगली बार यहीं बनेगा मतदान केंद्र
गांव पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर इस बार वाकरगंज जाकर वोट डालने व अगली बार मतदान केंद्र गांव में बनाने की बात कही, लेकिन इस पर भी ग्रामीणों ने हाथ उठाकर इंकार कर दिया।
602 के सापेक्ष में 41 वोट ही पड़े
वाकरगंज मतदान केंद्र की बूथ संख्या सात पर 602 वोटरों के सापेक्ष मात्र 41 ने ही मतदान किया। जबकि दूसरे बूथ पर 872 के सापेक्ष 661 वोट पड़े।
अधिकारियों की निगरानी में मतपेटियां हुई सील
मतदान समाप्त होने के बाद वाकरगंज मतदान केंद्र पर अधिकारियों व भारी पुलिस की मौजूदगी में मतपेटियां सील की गई। पोलिंग पार्टियों के रवाना होने के बाद ही अधिकारी वहां से हटे।
बोले लोग: सत्ता के दबाव में बदला गया मतदान केंद्र
गांव नवादा कंजा निवासी वृद्ध डोरीलाल ने बताया कि सत्ता के दबाव में आकर प्रशासन ने गलत तरीके से मतदान केंद्र बदला है। पूरे गांव में इसको लेकर नाराजगी है। सुखलाल ने बताया कि तीन दिन पहले तक अधिकारी इस बूथ को चेक करने आते रहे। पोलिंग पार्टी भी यहीं पहुंची। इससे जाहिर की है इसमें कोई बड़ी साजिश है। हरिका देवी का कहना था कि यहां सालों से वोट डालते जा रहे हैं, लेकिन पहली बार ही ऐसा हुआ है। गुपचुप तरीके से इसे बदला गया है।
चुनाव आयोग से होगी शिकायत
राज्यमंत्री की पुत्री व वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष को लाभ देने के लिए प्रशासन ने जानबूझकर मतदान केंद्र बदला है। यह एक बड़ी साजिश है। इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जाएगी।
सुरेश गंगवार, भाजपा जिलाध्यक्ष