गांव चंदिया हजारा के पंचायत घर में बैठक करते पीड़ित।स्रोत:ग्रामीण
पूरनपुर। पिछले साल के 55 कटान पीड़ितों को अब तक जमीन का पट्टा नहीं मिल सका है। चंदिया हजारा में कटान पीड़ितों की रविवार को पंचायत घर में बैठक हुई। तय किया गया कि जमीन का पट्टा सभी को एक साथ दिया जाए, ताकि विवाद की स्थिति न हो।
बांग्लादेश से विस्थापित 500 परिवारों को वर्ष 1976 में पुनर्वास योजना के तहत तहसील क्षेत्र के गांवों में बसाया गया था। बाद में कुछ परिवार कर्नाटक तो कुछ कानपुर शिफ्ट हो गए। इस समय गांव चंदिया हजारा में 315, गांव ढक्काचांट में 34 विस्थापित परिवार रहते है। इन परिवारों को ढ़ाई और तीन-तीन एकड़ जमीन दी गई थी, मगर जमीन राजस्व विभाग में स्थानांतरित न होने से जमीन का मालिकाना हक अब तक नहीं मिल सका।
पिछले साल शारदा नदी की बाढ़ में इन परिवारों सहित अन्य किसानों की दो सौ एकड़ जमीन पर खड़ी फसलें शारदा नदी में समा गईं थी।
विस्थापित परिवारों के पास जमीन का मालिकाना हक न होने से अब तक न तो मुआवजा दिया गया और न ही जमीन के पट्टे दिए गए। इसको लेकर पीड़ितों में रोष है। हालांकि प्रशासन पीड़ितों को पट्टा देना चाहता है, लेकिन इतने किसानों को एक साथ कैसे पट्टे की जमीन दी जाए इसको लेकर अफसर असमंजस मेंं है। इसको लेकर रविवार को विस्थापित परिवारों की गांव चंदिया हजारा के पंचायत घर में बैठक हुई।
बैठक में कहा गया कि प्रशासन सभी परिवारों को जमीन के पट्टे एक साथ दे। चाहे जमीन कम क्यों न हो। तय हुआ कि एक साथ ही सभी पट्टेदार जमीन का पट्टा लेंगे। ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि पीड़ित परिवार एक साथ पट्टा चाहते है। मगर प्रशासन इससे बचकर कुछ लोगों को दो तीन साल में पट्टा देने के मूड में है।