कलीनगर। शहर के नजदीक चहलकदमी कर दहशत का पर्याय बनी बाघिन दूसरे दिन भी पिंजरे में कैद रही। डिप्टी डायरेक्टर के आवास पर पिंजरे में बंद बाघिन की विभागीय चिकित्सक द्वारा जांच पड़ताल की गई। हालांकि बाघिन की सेहत के साथ आगे के अन्य निर्णय को लेकर अधिकारियों की ओर से अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।
अटकोना गांव से पकड़ने के बाद बाघिन के गले में कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ा गया था, लेकिन रुकने के बजाय बाघिन फिर रिहायशी इलाके में निकल आई। 11 जनवरी से बाघिन शहर के पांच किलोमीटर दायरे में घूम रही थी। रविवार को नौगवा के इस्लामनगर क्षेत्र में लगाएं गए पिंजरे में बाघिन कैद हो गई।
वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन को पीटीआर मुख्यालय ले जाया गया। शाम को डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल के आवास में पिंजरे समेत बाघिन को शिफ्ट किया गया। चंद अधिकारियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। सोमवार को भी छोड़े जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। विभागीय चिकित्सक भी जांच पड़ताल में जुटे रहे। प्राथमिक जांच के बाद बाघिन की सेहत के बारे में भी अधिकारी कुछ नहीं बता रहे हैं। चर्चा रही की बाघिन की तस्वीर व अन्य जानकारी के लीक होने के डर से छोटे कर्मचारियों को भी डिप्टी डायरेक्टर के आवास में जाने की अनुमति नहीं दी गई है।
आईवीआरआई के चिकित्सक ने किया बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण
कलीनगर। सोमवार दोपहर बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान केंद्र बरेली से डॉ. एएम पावड़े पीटीआर मुख्यालय पहुंचे। अफसरों के साथ पिंजरे के नजदीक पहुंच बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति को परखा। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि चिकित्सक द्वारा जरूरी जांच पड़ताल की गई। पूरी रिपोर्ट पीसीसीएफ को भेजी जाएगी। उच्च स्तरीय आदेश मिलने के बाद ही कुछ निर्णय लिया जा सकेगा। संंवाद