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नोट बंदी ने बढ़ाई मजदूरों की मुश्किलें

Sun, 27 Nov 2016 10:00 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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नोट बंदी ने बढ़ाई मजदूरों की मुश्किलें - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद अच्छे दिनों की आस लगाए मजदूर नोट बंदी के कारण मुश्किल में आ गए हैं। बाजार में छोटे नोटों की समस्या के चलते काम नहीं मिल रहा है, जिन्हें काम मिल रहा है उन्हें कम मजदूरी लेकर संतोष करना पड़ रहा है।
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शहर के गैस चौराहा पर सुबह पौ फटने के साथ ही दो जून की रोटी कमाने की आस में शहर सहित आसपास के गांव से बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में आते हैं। नौ बजे तक इन मजदूरों को शहर में चल रहे भवन निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम मिल जाता था लेकिन नोट बंदी के बाद से इनके आगे दिक्कत खड़ी हो गई है। मजदूरों का काम के बदले बड़े नोट देने का प्रयास किया जा रहा है जिससे उन्हें दिक्कत हो रही है वहीं छोटे लेने की शर्त पर काम करने वालों को अन्य की अपेक्षा कम मजदूरी मिल रही है। छोटे नोट न होने के कारण शहर में भी काम की कमी आई है जिससे अधिकांश मजदूरों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
कम मिल रही मजदूरी
मजदूरों ने बताया कि यूं तो शहर में 250 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी चल रही है लेकिन छोटे नोटों के कारण काम में आई कमी के कारण मोलभाव बढ़ गया है जिससे 180 से 200 रुपये तक में काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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बोले मजदूर : नहीं चाहिए ऐसे अच्छे दिन
गैस चौराहे पर सुबह बातचीत में मजदूरों ने बताया कि मोदी सरकार बनने से उनमें अच्छे दिनों की आस जगी थी लेकिन नोट बंदी ने हालात पहले से भी बदतर कर दिए। अब तक घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो रहा है-
3-3 दिन नहीं मिलती मजदूरी
नावकूड़ गांव से मजदूरी करने आए घनश्याम ने बताया कि नोट बंदी के कारण काम में मंदी आ गई है जिससे तीन तीन दिन तक बिना काम के खाली घर लौटना पड़ रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो भुखमरी के हालात हो जाएंगे।
कहां से लाए छोटे नोट
शहर के मोहल्ला छोटी मार्केट के इमरान कहना है कि जो लोग मजदूरों की तलाश में यहां आते हैं वह बड़े नोट होने की बात करते हैं और 4-5 मजदूरों को मिलाकर बड़े नोट देकर हिसाब करते हैं। ऐसे में वह छोटे नोट कहां से लाकर आपस में हिसाब करें और अपनी मजदूरी बांटे।
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