पीलीभीत। शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक घंटाघर की सूरत अब बदलने जा रही है। ब्रिटिश शासनकाल में बना यह घंटाघर दशकों से शहर की पहचान रहा है। पर्यटन विभाग ने इसके सुंदरीकरण के लिए 25.45 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से घंटाघर का पुनर्निर्माण, रंग-रोगन, प्रकाश व्यवस्था और एक नई घड़ी लगाने का कार्य किया जाएगा।
पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम भी घंटाघर का सर्वे कर चुकी है। शहरवासी और विभिन्न सामाजिक संगठन इसकी मरम्मत और सुंदरीकरण की मांग कर रहे थे। अब इसके दिन बहुरे हैं। पर्यटन विभाग की ओर से धनराशि जारी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई है। पर्यटन निगम अगले सप्ताह कार्य शुरू करेगा। बाजार के व्यापारियों का कहना है कि घंटाघर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि पीलीभीत की विरासत और गौरव का प्रतीक है।
घंटाघर पर लगे चार मुर्गे देते थे हवा का रूख
घंटाघर के ऊपर चार कोने पर मुर्गे लगे हुए थे। जिस ओर हवा चलती थी, मुर्गे की नजर उस ओर हो जाती थी। मगर घड़ी के साथ घंटाघर की शान यह मुर्गे भी खराब हो गए, अब हवा का रूख भी देना बंद कर दिया। नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन हरिओम ने ब्रिटिश काल की बंद घड़ी ठीक कराने का जिम्मा उठाया था। उन्होंने घड़ी बदलवाकर दूसरी लगवाई थी। वह भी ज्यादा समय तक चल नहीं पाई।
हमने बचपन से इस घंटाघर को देखा है। अगर इसकी शुरूआत फिर से हो जाएगी तो ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की अच्छी पहल रहेगी।
प्रदीप नवरंग, कपड़ा व्यापारी
घंटाघर को ठीक होने को लेकर लंबे समय से उत्सुकता है। अगर घंटाघर ठीक हो जाएगा, तो यह बहुत अच्छी की बात है।
राकेश नकटा, व्यापारी
पीलीभीत के घंटाघर को लेकर पर्यटन विभाग एक सप्ताह के अंदर सुंदरीकरण का कार्य आरंभ करने जा रहा है। घड़ी की स्थिति देखकर घड़ी का पुनर्निर्माण या बदलवाने का निर्णय लिया जाएगा।
रविन्द्र कुमार, उपनिदेशक पर्यटन विभाग