पीलीभीत। जिला अस्पताल में बाहर की दवा के नाम पर मरीजों को लूटने का खेल लंबे समय से चल रहा है। अस्पताल के लगभग हर विभाग में कलम के इशारे से पर्ची पर दवा लिखकर मेडिकल स्टोर तक सुझाया जा रहा है। इस खेल से अस्पताल के जिम्मेदार अच्छे से वाकिफ हैं। कई शिकायतेंं भी हुईं, लेकिन कमीशन का खेल अब तक नहीं थमा है। कुछ माह पूर्व एक महिला मरीज बाहर की दवा पर्ची लेकर सीएमएस के पास भी पहुंची थी, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। सवाल यह है कि कमीशन के इस खेल को किसकी मौन स्वीकृति मिली है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कसीदे तो खूब पढ़े जा रहे। मगर बाहर की दवा पर्ची बीमारी से निजात के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों का दर्द बढ़ा रही है।
इन दवाओं पर कमीशन का खेल अधिक
गैस और कब्ज के लिए लिखी जाने वाली डीसीआर, मल्टी विटामिन, सिरप और कई अन्य दवाएं हैं। जिन पर कमीशन का प्रतिशत 50 तक रहता है। कुछ दवाओं पर इससे भी अधिक कमीशन हाेता है। इसी तरह इंजेक्शन भी कंपनी के हिसाब से कमीशन का खेल चलता हैं। मरीज को एक-दो दवाएं भी बाहर की लिखने पर अच्छा कमीशन बन जाता है।
इन सवालों का जवाब भी बहुत जरूरी
- बाहर की दवा पर्ची का खेल सामने आने के बाद भी जिम्मेदार मौन क्यों हैं।
- जिम्मेदार चिकित्सकों को चिह्नित करने और उन पर कार्रवाई में हीलाहवाली क्यों हैं।
- अस्पताल में अगर सभी दवाएं उपलब्ध तो बाहर की दवा कैसे लिखी जा रही हैं।
- मेडिकल स्टोर से दवा लेने की सलाह देने वालों पर मेहरबानी का कारण क्या है।
- अस्पताल की बिगड़ती व्यवस्थाओं से जिला प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जनता के दर्द से बेखबर जनप्रतिनिधि
जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं की तस्वीर आए दिन उजागर होती है। कभी किसी मरीज को इलाज नहीं मिलता। किसी प्रसूता की लापरवाही में जान चली जाती है। बाहर की दवा पर्ची का खेल चल रहा है। जांच के नाम पर भी मनमानी हो रही है। जिले की जनता परेशान और जनप्रतिनिधि मरीजों के दर्द से अनजान बने हैं। यह हाल तब है, जब जिला अस्पताल में रोजाना करीब दो हजार लोग इलाज को पहुंच रहे हैं।