पीलीभीत। मैलानी के जंगल से बेहोश कर पकड़ी गई बाघिन को सोमवार सुबह पीटीआर मुख्यालय लाया गया। स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन स्वस्थ मिली। बाघिन के नए ठिकाने को लेकर अफसर मंथन कर रहे हैं कि इसे चिड़ियाघर में रखा जाए या जंगल में। सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में खुटार वन रेंज के अंतर्गत छह माह पूर्व से जंगल से बाहर घूम रही बाघिन का 10 दिन से आतंक बढ़ गया था। चतीपुर और नजीरगंज क्षेत्र में खेत में काम कर रहे दो ग्रामीणों को मारने के बाद बाघिन को पकड़ने की मांग उठाई जा रही थी।
शासन के निर्देश के बाद बाघिन को पकड़ने की कवायद तेज की गई थी। तीन दिन पूर्व से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा शाहजहांपुर और दुधवा की टीम बाघिन की निगरानी में जुटी थीं, लेकिन बाघिन टीम के हत्थे नहीं चढ़ सकी। इसके बाद लोकेशन के आधार पर टीम ने रविवार सुबह मैलानी के जंगल में दो सौ मीटर अंदर पड्डा बांधा। देर शाम शिकार के लालच में पहुंची बाघिन को पीटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार ने बेहोश किया।
बेहोश कर पकड़ने का कार्य दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी एच राजा मोहन की मौजूदगी में किया गया। रात में बाघिन को नजदीक की रेंज में रखा गया। सोमवार सुबह अफसरों के निर्देश पर बाघिन को पीटीआर मुख्यालय लाया गया। जहां चिकित्सकों की टीम ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसमें बाघिन स्वस्थ पाई गई। अफसरों के अनुसार बाघिन की उम्र ढाई से तीन साल की है। बाघिन को छोड़ने को लेकर मंथन किया जा रहा है। आदेश आने तक बाघिन को निगरानी में रखा गया है।