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घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटे

Sat, 03 Dec 2016 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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नाोटबंदी - फोटो : अमर उजाला
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घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली ही लौट रहे है लोग
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बैंक और एटीएम में नहीं हो पा रही कैश की पूर्ति
 नोट बंदी के  बाद से आम लोगों की दिनचर्या ही बदल गई है। सुबह उठकर अब लोगों का पहला काम बैंक और एटीएम की लाइन में लगकर नकदी का जुगाड़ करना हो गया है। नोट बंदी के 25 दिन बाद भी लोगों को राहत नहीं मिली है। शनिवार को भी लोग भुगतान पाने को बैंक और एटीएम के बाहर लाइन में लगे रहे लेकिन लाइन में लगने के बाद भी उन्हें नकदी नहीं मिली। वहीं मंडी स्थित इलाहाबाद बैंक की लाइन में खड़े एक वृद्ध धक्का लगने से गिर गए जिससे उनका कूल्हा टूट गया। हाल यह है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोग खाली ही लौट रहे है। 
नोट बंदी से आम जनता नकदी पाने को परेशान हैं। शनिवार सुबह शहर के एचडीएफसी, इंडियन बैंक के एटीएम में ही धनराशि निकली रही थीं जिसके लिए लोगों को लंबी कतार में लगकर घंटों मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, आईडीबीआई, एसबीआई, पीएनबी सहित कुछ बैंकों में ही भुगतान मिल सका। नकदी न मिलने से लोग परेशान हैं और उन्हें जरूरतें पूरी करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। अधिकांश सरकारी कर्मचारी अधिकारियों के बैंक खाते विकास भवन स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा एवं स्टेडियम रोड स्थित आईडीबीआई बैंक और पुलिस कर्मियों के खाते एक्सिस बैंक में हैं। सरकारी कर्मचारी इन बैंकों में नकदी निकालने पहुंचे लेकिन आईडीबाईआई और एक्सिस में ही नकदी मिल सकी जबकि विकास भवन स्थित बीओबी में नकदी न होने के कारण भुगतान नहीं हुए।
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आखिर कहां जा रहे है छोटे नोट?
आठ नवंबर को लागू हुई नोट बंदी के तीसरे दिन से ही बैंकों से छोटे नोटों का भुगतान किया जा रहा है। बैंक सूत्रों के मुताबिक जिले में अब तक 80 करोड़ रूपये की धनराशि बैंकों से निकाली जा चुकी है। बैंक से निकाली गई नकदी से लोग रोजमर्रा के कार्य कर रहे हैं और जरूरत की चीजें खरीद रहे हैं जिससे बैंकों से निकला रुपया मार्केट में पहुंच रहा है लेकिन मार्केट में पहुुंचा रुपया वापस बैंकों में नहीं पहुंच रहा है। हालंाकि कुछ व्यापारी दैनिक व्यवसाय से एकत्र छोटे नोट बैंकों में जमा भी कर रहे हैं लेकिन इनकी संख्या काफी कम और नाम मात्र की हैं। बैंकर्स का कहना है कि यदि मार्केट में गया रुपया घूमकर पुन: बैंक पहुंचने लगे तो काफी हद तक समस्या हल हो सकती हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो नोट बंदी के बाद से ही लोग बड़े नोट बैंक में जमा कर बदले में छोटे नोटों की जमाखोरी करने लगे हैं वहीं कई स्थानों पर बड़े नोटों के बदले छोटे नोटों की बिक्री कर रहे हैं जिससे बैंकों में लाइनें कम नहीं हो पा रही हैं।
 
 
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