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ग्रामीण अंचलों में बच्चों को नसीब नहीं हुआ दूध

Wed, 15 Jul 2015 11:53 PM IST
पीलीभीत।
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बिन बजट शासन के निर्देश पर अधिकतर स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन के साथ दूध भी दिया गया। लेकिन वितरण मानकों के अनुरूप नहीं हो पाया। कहीं पानी की मात्रा बढ़ा दी गई, कहीं कम मिला और ग्रामीण अंचल के कई स्कूलों में मिला ही नहीं। हालांकि शिक्षक सुबह से ही दूध की व्यवस्थाओं में लगे रहे। तड़के दुकानों व डेयरियों के आसपास मंडराते देखे गए। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को स्कूलों में दूध वितरण का जायजा लिया तो यह तस्वीर नजर आई।
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सीन 1-
पैक्ड दूध से चलाया गया काम
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुनगढ़ी में 34 बच्चों के सापेक्ष मात्र 20 बच्चे ही पहुुंचे। इन सभी बच्चों के लिए तीन लीटर दूध खरीदा गया। प्रधानाध्यापिका पंकज सक्सेना ने बताया कि डेयरी से तो दूध मिला नहीं, बाजार से पैकेट वाला खरीदकर काम चलाया जा रहा है।
पानी मिला दूध नसीब हुआ बच्चों को
प्राथमिक विद्यालय सुनगढ़ी नंबर एक व दो में उपस्थित 53 बच्चों के लिए दस लीटर दूध का इंतजाम किया गया, लेकिन यहां बच्चों का पानी मिला हुआ दूध ही नसीब हुआ। प्रधानाध्यापक रफीक अहमद ने बताया कि दूधिए से आठ लीटर व बाजार से 45 रुपये लीटर के भाव से पैक्ड दूध खरीदा गया।
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87 बच्चों को सिर्फ दस लीटर ही मिला दूध
प्राथमिक विद्यालय गौहनिया में 148 बच्चों के सापेक्ष पहुंचे 87 बच्चों को मात्र दस लीटर दूध ही नसीब हो सका। दूध वितरण के नाम पर बच्चों को मात्र रस्मअदायगी कर टरका दिया गया। हेडमास्टर मोहम्मद जमशेद ने बताया कि दूध की काफी कमी है। मंगलवार शाम से पैक्ड दूध खरीद कर रख लिया था।
15 लीटर की जगह सात लीटर से की गई खानापूरी
प्राथमिक विद्यालय चिडिंयादाह में दूध वितरण के नाम पर महज खानापूरी की गई। पंजीकृत 150 बच्चों के सापेक्ष बुधवार को 78 बच्चे पहुंचे। प्रधानाध्यापिका अरुणलता ने बताया कि ग्रामप्रधान ने सात लीटर दूध भेजा है। दूध उबाल कर बच्चों को दिया जा रहा है।
पूरनपुर के अधिकांश स्कूलों में नहीं मिला दूध
क्षेत्र के कई परिषदीय स्कूलों में बुधवार को बच्चों को दूध नहीं मिला। कुछ स्कूलों में औपचारिकतावश बच्चों को दूध और कोफ्ता चावल दिए गए।
शेरपुरकलां में भी मानक के अनुसार नहीं मिला दूध
शेरपुरकलां। प्राइमरी स्कूल नंबर एक में 91, नंबर दो में 54, जूनियर हाईस्कूल में 22 बच्चों को दूध बांटा गया। प्राइमरी स्कूल पजाबा में 50 बच्चों को दूध दिया गया और कोफ्ता चावल दिए गए। अधिकतर स्कूलों में दूध के नाम पर महज रस्मअदायगी की गई।
घुंघचाई के अधिकतर स्कूलों में नहीं मिला बच्चों को दूध
घुंघचाई। कस्बे के जूनियर हाईस्कूल, कन्या जूनियर हाईस्कूल में बच्चों को दूध और कोफ्ता चावल दिया गया। जूनियर हाईस्कूल सिमरिया में 203 बच्चों को कोफ्ता चावल तो दिए गए, लेकिन दूध नहीं दिया गया। इंचार्ज शिक्षिका निर्मला सिंह ने बताया कि दूध का इंतजाम नहीं हो सका। इसी गांव के प्राइमरी स्कूल में न तो बच्चों को दूध दिया गया और न कोख्ता चावल दिए गए। इंचार्ज शिक्षिका जयश्री ने बताया कि छह महीने से कंवर्र्जन कास्ट न मिलने से समस्या हुई। घाटमपुर के जूनियर हाईस्कूल में 180 बच्चों को कोफ्ता चावल तो दिए गए, लेकिन दूध नहीं दिया गया। प्रधानाध्यापक मुक्ता प्रसाद ने बताया कि दूध न मिलने से समस्या हुई।
बिलसंडा के कई स्कूलों में दूध से वंचित रहे बच्चे
बिलसंडा। क्षेत्र के अधिकतर परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मानक से कम दूध दिया गया। गांव कनपरी के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को कोफ्ते चावल तो मिले, दोनों स्कूलों के बच्चों को दूध नहीं मिल सका। गांव महोलिया और जमुनिया ता. ईंटगांव के भी बच्चों को दूध नसीब नहीं हुआ। इन विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि दूध की व्यवस्था करने के लिए प्रयास तो किया, लेकिन मिल नहीं पाया। उधर बीएसए अमरीश यादव, बीईओ डीएल राना और एबीआरसी एवं एनपीआरसी समेत लोगों ने स्कूलों में पहुंचकर चेकिंग भी की।
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