संपूर्णानगर (खीरी) की टाटरगंज वन चौकी पर उप्रदव करने में चार साल पहले मर चुकी महिला भी शामिल थी। इसके अलावा कई ऐसे लोग भी थे, जो गांव में पिछले कई सालों से रह ही नहीं रहे हैं। जी हां...यह कारनामा वन दरोगा की तहरीर पर हजारा पुलिस ने अंजाम दिया है। छानबीन के दौरान जब नामजद की गई महिला के चार साल पहले मरने की बात पता चली तो हजारा पुलिस के होश उड़ गए। अब पुलिस ने गलत नामजद किए गए तीन के नाम हटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
बता दें कि 24 जुलाई को संपूर्णानगर खीरी की टाटरगंज वन चौकी पर भीड़ ने हमला बोला था। इसमें वनकर्मियों से मारपीट कर तोड़फोड़ की गई थी। सरकारी राइफल और कारतूस लूटने का आरोप भी भीड़ पर लगाया गया था। घटना की वन दरोगा ऋषभ प्रताप सिंह की ओर से 24 नामजद और करीब तीस अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मामले में मुख्य आरोपी परमजीत सिंह समेत तीन को पुलिस जेल भेज चुकी है। वन दरोगा की ओर से गांव के ही कृपाल की मां, उसकी पत्नी और गांव के शमशेर क बहन को भी नामजद किया गया था। घटना में इनकी संलिप्तता को लेकर हजारा पुलिस ने गांव जाकर जानकारी जुटाई। इसमें पता लगा कि कृपाल की मां का चार साल पहले ही देहांत हो चुका है। उसकी पत्नी भी कई सालों से उससे अलग रह रही है। इसके अलावा नामजद की गई तीसरी महिला भी सालों से गांव लौटी ही नहीं है। मर चुकी महिला की नामजदगी किए जाने का पता लगते ही पुलिस ने अन्य ग्रामीणों से भी पूछताछ की। जिसमें मामला सही पाया गया। एसओ हजारा जसपाल सिंह ग्वाल ने बताया कि एक महिला की मौत चार साल पहले हो चुकी है। इसके अलावा दो महिलाएं गांव में आई ही नहंी है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से उनको नामजद कर दिया गया था। तीनों की नामजदगी गलत पाई गई है। अफसरों को इससे अवगत करा दिया गया है। अधिकारियों के निर्देशानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।