नेशनल इंट्रीग्रेटेड मेडीकल एसोसिएशन (नीमा) की कार्यशाला में तनाव से
शरीर में होने वाली विकृतियों पर चर्चा की गई। कार्यशाला में अत्यधिक
वसायुक्त भोजन और जंकफूड न कर सुपाच्य भोजन करने पर जोर दिया गया।
नगर
के एक होटल में हुई कार्यशाला में नीमा अध्यक्ष डॉ. दिनेश गुप्ता ने कहा कि
तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी और पाश्चात्य संस्कृति के चलते हर दूसरा व्यक्ति
तनावग्रस्त है। तनाव की वजह से पित्त अम्लीय हो जाता है। अम्ल का रिसाव
बढ़ने से पेट के ऊपरी भाग में दर्द, जलन और कभी-कभी उल्टी की शिकायत होने
लगती है। इस दर्द का दिल के दौरे से समानता होने के कारण इसका निदान
मुश्किल हो जाता है। अत्यधिक वसायुक्त भोजन और जंकफूड से दूर रहने की जरुरत
है।
उन्होंने कहा कि अधिक तनाव में अम्ल के ज्यादा बनने से पेट में
घाव (अल्सर) आदि बन जाता है। व्यक्ति को सुपाच्य भोजन करना चाहिए, ताकि
भोजन आराम से पच सके। गरिष्ठ भोजन, कॉफी, चाय, बर्गर, तले हुए भोज्य पदार्थ
से बचना चाहिए। अगर फिर भी लाभ न हो, चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
कार्यशाला
में डॉ. प्रवीन गुप्ता, डॉ. सुखदेव चंदी, डॉ. कैलाश, डॉ. राजेद्र, डॉ.
अवलोक सिंह, डॉ. तनवीर अहमद, डॉ. शमशुल, डॉ. शकील, डॉ. युसुफ, डॉ. नदीम आदि
मौजूद रहे। अंत में नीमा के सचिव डॉ. अमित विश्वास ने आभार व्यक्त किया।