पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में बीसलपुर व बिलसंडा ब्लाक में हुए मतदान के दौरान युवा मतदाताओं ने भी अपनी ताकत का अहसास कराया। अधिकतर युवा मतदाता गांव में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर काफी आहत दिखे। युवाओं का कहना था कि अब उसी प्रत्याशी को वोट दिया है जो जनता की आम सहमति के बाद गांव में विकास कराएगा। इसको लेकर मतदान करने वाले युवा मतदाताओं से रायशुमारी की गई।
पट्टी मतदान केंद्र पर अपने साथी के साथ पहुंचे श्रीकांत ने बताया कि ग्राम प्रधान को तो गांव वाले ही चुनते हैं, लेकिन ग्राम प्रधान विकास अपनी मनमर्जी के मुताबिक करते हैं। ऐसे में पूरे गांव में विकास नहीं हो पाता। इस बार युवाओं ने तय किया है कि हम ऐसे प्रत्याशी को वोट करेंगे जो गांव वालों की राय से विकास कार्य करवाए।
महेशपुर मतदान करने पहुंची रेखा ने बताया कि गांवों को विकास नगर व कस्बों की तर्ज पर हो, इसको लेकर सरकार भी प्रयास करती है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। इस बार वोटरों ने तय किया है कि जो गांव का संपूर्ण विकास कराएगा उसे ही वोट देंगे और ऐसा ही किया गया है।
गांव महेशपुर निवासी संजीव कहते हैं कि मतदान से पहले सभी प्रत्याशी लंबे चौड़े वादे करते हैं और चुनाव निपटने के बाद उसे भूल जाते हैं। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा है। इस बार ऐसा नहीं होगा। यदि चुने गए प्रधान ने विकास नहीं कराया तो उससे इसका जवाब मांगा जाएगा।
67 वर्षीय बुजुर्ग मोर सिंह
ने पहली बार डाला
बिलसंडा ब्लाक के गांव पिपरगहना निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग मोर सिंह जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही उपेक्षा से इतने आहत हैं कि उन्होंने जीवन के 66 बसंत गुजरने के दौरान एक बार भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया। मुख्य मार्ग के किनारे स्थित अपने घर में चारपाई पर बैठे मोर सिंह ने बताया कि चुनाव के नाम पर सिर्फ मजाक ही किया जाता रहा है। कोई भी प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद अपनी बात पर खरा नहीं उतरा। किसी ने आज तक गांव का दर्द जानने की कोशिश नहीं की। हालांकि गांव वालों ने मोर सिंह को मतदान करने के लिए समझाया। इसी कारण उन्होंने शुक्रवार को गांव स्थित मतदान केंद्र पर पहुंचकर पहली बार अपने मत का प्रयोग किया।