पीलीभीत। शहर से लेकर देहात तक बंदरों का आतंक लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। बंदरों के झुंड आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले में रोजाना औसतन 15 लोग बंदरों के हमले में घायल हो रहे हैं।
ईओ संजीव कुमार का दावा है कि स्थिति बिगड़ने की शिकायत मिलने पर संबंधित क्षेत्र से बंदर को पकड़वाया जाता है। लेकिन, जमीनी हकीकत इसके उलट है। नगर पालिका और पंचायत स्तर पर अबतक कोई ठोस प्रयास शुरू नहीं किए गए। सभी दावे बंदरों की धमाचौकड़ी के आगे चित हैं।
जिले की पहचान पीटीआर से हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बात आती है तो बाघ और तेंदुओं की ओर लोगों का ध्यान जाता है, लेकिन वन्यजीवों के अलावा बंदराें का आतंक भी लोगों के लिए परेशानी बन गया है।
शहर के मोहल्ला साहूकारा, मोहल्ला थान सिंह, मोहल्ला केसरी सिंह, एकता नगर, मोहल्ला पूरनमल, मोहल्ला सुनगढ़ी आदि क्षेत्रों में बंदरों के झुंड हर समय बना रहता है, जो लोगोंं के लिए परेशानी का सबब बनता है। बंदर घरों की छतों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर डेरा जमाए रहते हैं।
कई बार बंदर अचानक हमला कर देते हैं। बचने की कोशिश में लोग छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।
जख्मी होते रहे लोग, दूर नहीं हो सकी समस्या : पिपरिया भजा गांव में 18 मई 2025 को जुलेखा पत्नी ननकू बख्श पर बंदरों ने हमला कर दिया।
बंदरों से बचने की कोशिश में वह छत से नीचे गिर गईं। हादसे में उनका एक हाथ और एक पैर टूट गया। वहीं ग्राम चुड़ैला बंजरिया को सात फरवरी 2026 को हेमवती घर में दूध रखने जा रही थीं। तभी बंदर ने उन पर हमला कर दिया।
बंदर ने उनके चेहरे पर काट लिया। घायल महिला को गजरौला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर उपचार कराया गया था।
अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही : बंदर के काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रोजाना करीब 15 पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं। पिछले तीन माह में यह संख्या एक हजार से अधिक बताई जा रही है। इसमें मई में 329, जून में 410 और जुलाई में 387 लोग बंदर काटने के बाद टीकाकरण के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। यह स्थिति तब है जब अधिकारी यह सभी दावे कर रहे हैं कि जगह-जगह बंदरों को पकड़वाया जा रहा है।