जकटना नदी की धारा सौ से ज्यादा गांवों को बीसलपुर से अलग करती है। अंग्रेजों ने अपने शासन में इन गांवों को बीसलपुर से जोड़ने के लिए जो पुल बनाया था वह आवाजाही बढ़ जाने से लोगों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा है। नदी का पाट सिमट गया है लिहाजा जब बाढ़ आती है तो जलमग्न भी हो जाता है। बाढ़ रहने तक ये गांव टापू बने रहते हैं। कई सालों से इन गांवों के लोग कटना नदी पर नया पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक वादों और आश्वासनों से ज्यादा उन्हें कुछ नहीं मिल पाया है। बिलसंडा रोड पर गांव मानपुर के पास ब्रिटिश काल में बना पुल काफी छोटा और संकरा है, लेकिन इस पर 24 घंटे वाहनों की आवाजाही रहती है। संकरा होने के कारण पुल पर एक बार में एक ही चौपहिया वाहन गुजर पाता है, इस वजह से अक्सर इस पर जाम लग जाता है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर अंग्रेजों के जमाने का यह पुल कई-कई दिन पानी में डूबा रहता है। इन दिनों में यातायात बंद हो जाता है। लोगों को बीसलपुर आने-जाने के लिए ईंटगांव और खनंका होकर काफी लंबा चक्कर काटना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों की जनता कई दशक से कटना नदी पर नया पुल बनाने की मांग करती आ रही है लेकिन किसी विधायक या सांसद ने इस पर ध्यान नहीं दिया। हर चुनाव में पुल के निर्माण की मांग मुद्दा बनती है, नेता चुनाव जीतने पर पुल बनवाने का वादा करते हैं लेकिन फिर यह मुद्दा अगले चुनाव तक के लिए ठंडा हो जाता है। इस बार फिर मतदाता वोट मांगने आ रहे उम्मीदवारों के आगे अपना दुखड़ा रो रहे हैं। पुल बनवाने के लिए कोई कुछ करेगा या नहीं यह तो चुनाव बाद पता चलेगा लेकिन फिलहाल आश्वासन तो खूब मिल रहे हैं।
100 से ज्यादा गांवों की समस्या
पुल न होने की वजह से बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र के सौ से ज्यादा गांवों के लोग पूरे साल दिक्कतें झेलते हैं। बरसात में ये दिक्कतें और ज्यादा बढ़ जाती हैं। परेशानी झेलने वाले इलाकों में बिलसंडा, दियोरिया, मधवापुर, मकरंदापुर, बिहारीपुर हीरा, नौगवां संतोष, रामपुर, अमृत, ईंटगांव, नौगवां नबीनगर, रामशाला, भीकमपुर, मार, पगार, इरादतपुर, बमरोली, करेली, नांद, केंचुआ, वीरसिंह पुर, खरदहाई, खरदाह, कनपरा, कनपरी, घुरी पट्टी, घुरी खास, बहादियां, अकोड़ा, आजमपुर बरखेड़ा, अकोड़ा, कुुरैइया, दियोकलियां, मानपुर, टेहरी, पसगंवा, चरखौला, घुघंचईया, परेवा, तुर्राह, मवैइया समेत तमाम इलाके शामिल हैं।