हरियाणा मजदूरी करने गए पांच मजदूरों की वहां हादसे में हुई मौत के मामले में गांव बंजरिया में मंगलवार को भोर होते ही चारों युवकों के शव पहुंचे। चारों युवकों का एक साथ अलग-अलग तीन स्थानों पर अंतिम संस्कार किया गया। दोनों भाईयों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार हुआ।
रविवार को हरियाणा के खरखौदा के गांव निजामपुर में कोठरी ढहने से जिले के मरने वाले पांच लोगों में से चार गांव बंजरिया के थे। जिनके शव आने का इंतजार उनके परिवार वाले दो दिन से कर रहे थे। नाते-रिश्तेदार भी सोमवार को ही पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद चारों युवकों के शव मंगलवार को सुबह करीब सवा छह बजे एंबुलेंस से गांव पहुंचे। युवकों के शव गांव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया। चारों युवकों का अंतिम संस्कार गांव के समीप तीन स्थानों पर किया गया। इसमें रोहित वाल्मीकि की चिता को मुखाग्नि उसके पिता भगवानदास ने, अशोक भारती की चिता को मुखाग्नि उसके पिता महेश भारती ने और अमित मिश्र और उसके भाई देवसरन की चिता को मुखाग्नि उनके पिता राम प्रताप ने दी।
यज्ञोपवीत पहनाकर देवसरन का किया संस्कार
पूरनपुर। हिंदू धर्म में अविवाहित का दाह संस्कार न कर दफनाने की परंपरा है। अमित मिश्र और देवसरन की मौत पर उनके पिता रामप्रताप का कहना था कि अमित और देवसरन दोनों एक साथ रहते थे। एक साथ ही हरियाणा मजदूरी करने को गए थे। एक साथ ही दोनों की मौत हुई है। ऐसे में एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार होगा। चूंकि देवसरन अविवाहित था। इसको लेकर अंतिम संस्कार से पहले देवसरन को यज्ञोपवीत पहनाया गया और गांव के पूरब कुछ दूरी पर दोनों भाईयों की एक ही चिता सजा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि रोहित का अंतिम संस्कार गांव के उत्तर कुछ दूरी पर और अशोक भारती का अंतिम संस्कार गांव के दक्षिण कुछ दूरी पर किया गया।
स्कूलों में हुई शोकसभा
पूरनपुर। मंगलवार को युवकों के एक साथ अलग-अलग तीन स्थानों पर अंतिम संस्कार में गांव के अधिकांश लोगों के अलावा आसपास गांव के लोगों आदि ने भाग लिया। गांव में सन्नाटा पसर रहा। गांव के चार युवकों की एक साथ मौत के शोक में गांव के प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक स्कूल में शोक सभा कर शोकाअवकाश कर दिया गया। स्कूल में भी नाममात्र को बच्चे ही पहुंचे थे।
घटना को याद कर अब भी सहम जाता चश्मदीद सूरज
हरियाणा के जिस कोठरे मेें मजदूरों ठहराया गया था, वह पहले ही जर्जर था। घटना को याद कर चश्मदीद घायल सूरज अब भी सहम जाता है। सूरज का कहना है कि अगर खेत स्वामी उन लोगों की बात मान लेता तब हादसे को टाला जा सकता था। हालांकि हादसे में खेत स्वामी की भी मौत हुई।
हादसे में मृतक रोहित के छोटे भाई सूरज वाल्मीकि ने बताया कि जिस कोठरे में उन लोगों को ठहराया गया था वह जर्जर था और आंधी आने पर हिलने लगता था। घटना से एक दिन पहले भी खेत स्वामी को इसकी जानकारी देकर पॉलीथिन का इंतजाम कर और कही ठहराने को कई बार कहा था, लेकिन वह नहीं माना। अगर खेत स्वामी उन लोगों की बात को गंभीरता से लेता तब हादसे को बचाया जा सकता था। सूरज ने बताया कि घटना के दिन तेज बारिश हो रही थी। खेत स्वामी बल्लू भी उन लोगों के पास आया था। तब भी उसे भवन के हिलने की जानकारी दी। तब भी उसका कहना था कि बेफ्रिक रहो। इसके बाद सभी ने चाय पी। चाय पीकर उसको छोड़ सभी लेट कर आराम करने लगे। इस दौरान अचानक दो मंजिला भवन ढह गया। घटना स्थल पर ही छह लोगों की दबकर मौत हो गई।
गले तक मलबे में दब गया था सूरज
सूरज ने बताया कि घटना के समय भवन में खड़ी एक साइकिल के पास वह बैठा था। जब भवन ढहा तो गले से ऊपर तक मलबे से दब गया था। कुछ देर तो उसे कुछ समझ में ही नहीं आया। जब सांस लेने में दिक्कत हुई। तब उसे मलबे में दबे होने का एहसास हुआ। एक हाथ उसका मलबा गिरते समय सिर से ऊपर साइकिल के हैंडिल के पास अचानक आ गया था। हाथ से मुंह और नाक के समीप के मलबे को हटाकर उसने जोर-जोर से चीखना शुरू किया। चाीखते-चीखते उसका गला भर गया था। बारिश कुछ थमने पर पड़ोस के फार्म पर नौकरी करने वाला नेपाल का काशी पहुंचा। काशी ने शोर-शराबा किया। तब पास-पड़ोस के लोग एकत्र हुए। करीब पौन घंटे बाद लोगों ने मलबे को हटाना शुरू किया। तब उसे निकाला गया। इसके बाद सभी लोगों के शव निकले गए।
आंधी पानी में पन्नी तान कर खड़े रहे थे साथी
सूरज ने बताया कि दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से धान की रोपाई बंद चल रही थी। दो दिन पहले आई तेज आंधी और बरसात पर भवन कही ढह न जाए, इसको लेकर समीप स्थित एक स्थान पर छोटी-छोटी पन्नी से ढककर सभी लोग खड़े रहे थे। आंधी, बारिश थमने पर भवन नहीं ढहेगा की सोच कर भवन में पहुंचे थे। कि इसी बीच अचानक भवन ढह गया।
डीएम से शिकायत पर मिलवाया गया घायल को
हादसे की सूचना पर हरियाणा पहुंचे गांव बंजरिया के लोगों को करीब दो घंटे तक न तो शव दिखाए गए और न ही घायल सूरज से मिलवाया गया। गांव बंजरिया के आलोक मिश्र ने बताया कि पुलिस कर्मी बार-बार शवों के पोस्टमार्टम के लिए हस्ताक्षर करने का दबाब बना रहे थे। शव न दिखाने और घायल से न मिलवाने पर उन लोगों ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। पूरे मामले की सूचना वहां के एएसपी और डीएम को दी। डीएम के आदेश पर घायल से मिलवाया गया और शव दिखाए गए।
क्षतविक्षत हो गए थे शव
गांव निवासी आलोक मिश्र ने बताया कि चारों युवकों के शव क्षतविक्षत हो गए थे। उनके मुंह बुरी तरह से मलबे में दबकर कुचल गए थे।