पीलीभीत। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मरीजों को लगातार परेशान कर रही है। नियमित पेट, कब्ज, पेशाब की बीमारी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मेडिसिन चिकित्सक से परामर्श देकर लौटाया जा रहा है। वहीं, जांच में मरीज गंभीर स्थिति में मिलता है तो उसको बरेली या लखनऊ रेफर किया जा रहा है। इससे मरीजों का समय व अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्धीकरण हुए लगभग तीन साल हो गया है। इस समय अंतराल में चिकित्सकों की सेवाएं तो बढ़ीं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में नियमित पेट में लीवर, किडनी, पेशाब की बीमारी, हृदय रोग व मांसपेशियों की समस्या से जुड़े आते हैं। नियमित ओपीडी में ऐसे 50-100 मरीजों की जांच में बीमारी भी पकड़ी जाती है, लेकिन उनको यूरोलॉजिस्ट, नेफरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन जैसे विशेषज्ञों की उपलब्धता नहीं मिलने पर मामूली मेडिसिन चिकित्सक का परामर्श देकर वापस लौटा दिया जाता है।
कई बार मरीजों को लखनऊ, बरेली जाना पड़ता है, जहां हजारों रुपये तक खर्च होते हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज की ओर से हर बार विशेषज्ञों के पद भरने के प्रयास का दावा किया जाता है, लेकिन चिकित्सक नहीं मिल पाते। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा का कहना है कि उनकी ओर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़े। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में पत्राचार भी किए जा चुके हैं। संवाद